World Economic Collapse

 

मेरा नाम सौरभ है और आज का मेरा आर्टिकल World Economic Collapse आपको आगाह करने के लिए है।

जी हाँ, आज जब आप मेरा ये आर्टिकल पढ़ रहे हैं तो यहीं से उलटी गिनती शुरू हो रही है World Economic Collapse की। जहाँ तक अनुमान है सिर्फ 2 हफ्तों का समय शेष है और तारीख भी तय हो चुकी है जो है 13 अगस्त 2020.

 

 

World Economic Collapse Kya hai ?

 

World Economic Collapseमेरे पूर्व के आर्टिकल्स में जैसा कि मैं पहले ही कह चुका हूँ क़ि अमेरिका की कंपनियों का कुल क़र्ज़ उसकी जीडीपी का 120% हो गया है जिसकी वजह से अमेरिका सहित उस देश का एक एक व्यक्ति आज के समय में तकनीकी रूप से दिवालिया हो चुका है।

ऐसे में कोरोना के चलते बाकि के धंधे भी मंदे हो गए हैं। सिर्फ एक ही रास्ता है फिलहाल इस तबाही को टालने का और वो है प्रति व्यक्ति 600$ का प्रोत्साहन पैकेज।

अगर ये पैकेज सरकार द्वारा उसकी जनता को नहीं दिया गया तो 13 अगस्त की तारीख इतिहास में एक काले दिन के रूप में लिखी जाएगी। क्योंकि दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं इसलिए इस बात का असर पूरी दुनिया में होगा, कोई भी देश इस तबाही से बच नहीं पायेगा।

 

Global Currency Reset Kya Hai ?

World Economic Collapse के कारण

 

#बैंकिंग सिस्टम:-

इसे कुछ ऐसे समझिये, 1972 में जब अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन ने डॉलर पर से गोल्ड स्टैण्डर्ड की बाध्यता हटा दी तो अमेरिका का जो केंद्रीय बैंक है जिसे फ़ेडरल रिज़र्व कहते हैं उसे ये छूट मिल गई कि वो जब चाहे जितनी भी चाहे नई मुद्रा छाप सकता है।

इस घटना के बाद से ही अमेरिका सहित पूरे विश्व में बाज़ारीकरण का दौर शुरू हो गया। बैंको के पास भर भर के पैसा आ गया लोन बांटने के लिए और बैंकिंग सिस्टम का जो एक नियम है कि कोई भी बैंक अपनी कुल जमा राशि के 10 गुना वैल्यू के लोन बांट सकता है,

इस नियम ने इस तबाही की शुरुआत कर दी थी। इस नियम की बदौलत ही एक अदृश्य मुद्रा सिस्टम में उत्पन्न हो गई जो कहीं थी ही नहीं मगर कंपनियों को दिया जाने वाला लोन बढ़ता गया।

 

#पेंशन स्कीम:-

 

आज का वक़्त सूचना युग है मगर इससे पहले औद्योगिक युग था, जिसमे लोगों को शिक्षा दी जाती थी कि कैसे एक अच्छा कर्मचारी बना जा सकता है।

1980 से पहले पैदा हुए लोगों को बेबी बूमर्स कहा जाता है, जिनका दिमाग एक कर्मचारी की तरह ही सोचता है, जैसे जॉब सिक्योरिटी, एकमुश्त रकम, रटे रटाये काम, काम के तय घंटे, साल की तय छुट्टियां, सालाना आय में वृद्धि, EPF और पेंशन।

सारी उम्र एक ही तरह के काम को करते हुए अपनी ज़िन्दगी काट देना, रिटायरमेंट के बाद बचाये हुए पैसों से एक घर बना लेना, पेंशन के बलबूते बची हुई ज़िन्दगी काटने की उम्मीद लगाना ये एक कॉमन फैक्टर है इस वर्ग के लोगों का।

1980 के बाद पैदा हुए लोगों को मिलनिअल्स कहा जाता है जो काम करने मामले में बेबी बूमर्स से 10 गुना तेज होते हैं, मगर जो सबसे बड़ा बोझ आज के समय इस वर्ग पर है वो है बेबी बूमर्स के पेंशन की टेंशन।

दुनिया भर में रोज़ाना लाखों बेबी बूमर्स रिटायर हो रहे हैं जिसके कारण सरकारों पर पेंशन का बोझ बढ़ता जा रहा है और ये बोझ मिलनिअल्स पर आ रहा है टैक्स के रूप में।

जब सरकार के पास पैसा नहीं होगा तो वो टैक्स बढ़ाती हैं ताकि पेंशन देने के लिए उनके पास पैसा बना रहे मगर वो इतना भी नहीं बढ़ा सकती कि लोगों की कमर ही टूट जाये।

ऐसे में सिर्फ एक ही रास्ता बचता है और वो है नए नोट छापना। इस छपाई की वजह से डॉलर की वैल्यू लगातार कम होती गई, ऐसा सिर्फ इस तबाही को टालने के लिए किया गया।

जहाँ ज़रूरत पड़े कि पैसे चाहिए तुरंत छाप दिए। अमेरिका आज भी रोज़ 125 बिलियन डॉलर छाप रहा है आपने खर्चों को पूरा करने के लिए।

अमेरिका ये छापे हुए नोट अपनी कंपनियों में डालता रहा जिससे कि वो पेंशन देने लायक बची रहें मगर हुआ इसका उलट।

क्योंकि ये पैसा बिना बैंकिंग सिस्टम से डाला नहीं जा सकता था इसलिए बैंकों से लोन के रूप में दिया गया, मगर अब वक़्त ऐसा आ गया कि कंपनियों के ऊपर जो बैंकों का लोन है वो अमेरिका की कुल जीडीपी का 120 % हो गया है, ऐसे में कंपनियों ने खुद को दिवालिया घोषित करना शुरू कर दिया है।

जब ये कंपनियां ही दिवालिया हो जाएँगी तो बैंक कहाँ बचेंगे ? उन्होंने सारा लोन तो इन्ही कंपनियों को दे रखा है।

 

#दूसरे देशों पर इसका असर :-

 

दुनिया भर के देश इस तबाही का शिकार होंगे ये तय है क्योंकि सभी अमेरिकी डॉलर को ही ग्लोबल करेंसी के रूप में सहेजकर रखते हैं।

अमेरिका की अर्थव्यवस्था गिरते ही ये अमेरिकी डॉलर्स एक कागज़ के टुकड़े से ज़्यादा नहीं रह जायेंगे। क्योंकि डॉलर अब खुद में करेंसी नहीं रह जायेगा।

इसकी भनक दुनिया भर के देशों को पहले से है, इसीलिए वो गोल्ड और सिल्वर से अपने खजाने भरने में व्यस्त हैं।

इसकी ज़द में हर वो इंसान आएगा जिसने डॉलर, रुपया, येन, रूबल, युआन या दीनार बचाकर रखे होंगे।

 

World Economic Collapse से खुद को कैसे बचाएँ

 

World Economic Collapse –भगवान पर भरोसा रखिये और भगवान् के पैसों पर भी। जितना हो सके अपने पैसों को Gold, Silver या Bitcoin में बदल लीजिये। वैसे तो गोल्ड अपने दामों के 100% पर पहुंच चुका है, बिटकॉइन 10000$ से ऊपर जा चुका है

तो इसे खरीदना सबके बस की बात नहीं मगर सिल्वर अभी अपनी 50 % वैल्यू पर मिल रहा है। ये एक अच्छा विकल्प अभी बचा हुआ है, जिसकी मदद से आप अपनी जमा पूँजी को बचाकर रख सकते हैं।

तो दोस्तों मैंने यहाँ आपको इस तबाही के आने, उसकी प्रमुख वजहों और उससे बचने के उपायों के बारे में जानकारी दी। सिर्फ कुछ दिन ही शेष हैं, अभी से तैयारी करना शुरू कर दीजिये ये कोई कोरी कल्पना नहीं हैं।

आज से 4 महीने पहले क्या किसी ने सोचा था कि पूरी दुनिया में ऐसा कोई वायरस आएगा जो दुनियाभर की अर्थव्यवस्था के पहिये को एकदम से रोक देगा।

अपने ही देश में ले लीजिये जो लोग इसके बारे में आगाह कर भी रहे थे उनकी बातों को हलके में लिया गया और हंसी उड़ाई गई मगर हुआ क्या ?

आशा करता हूँ, ये World Economic Collapse जानकारी आपके बेहद काम आएगी।

 

तब तक के लिए

 

सादर नमस्कार

 

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