How To Achieve Success After Failures in Hindi

How To Achieve Success After Failures In Hindi – मेरा नाम सौरभ है और आज मैं आपके लिए लेकर आया हूँ एक अहम् जानकारी जिसको समझकर आप अपनी ज़िंदगी में एक सफल इंसान बन सकते हैं।

सबसे पहले तो हमारी शिक्षा व्यवस्था कुछ ऐसी है जो हमें कभी आगे बढ़ने ही नहीं देती। अगर आपको ध्यान हो बचपन में जब हमें अंग्रेजी के प्रश्नो के उत्तर लिखने होते थे तो हमारे टीचर्स हमें समझाने के बजाये ट्रिक्स बताते थे जिससे कि हम अच्छा स्कोर कर सकें चाहे हमें वो विषय समझ में आये या ना आये।

उदाहरण के लिए नीचे दिया गया प्रश्न व् उसके दिए गए उत्तर को समझने की कोशिश कीजिये :-

Que : Where was Suresh going ?

Ans : Suresh was going to the market.

हमें कभी सुरेश के मार्केट जाने के पीछे की कहानी समझाने के बजाये हमेशा शॉर्टकट में बताया गया कि “Suresh was going” तो प्रश्न से ही मिल जायेगा जबकि सिर्फ “to the market” याद रखना है।

और उस वक़्त हमें से बहुत अच्छा भी लगता था तात्कालिक रूप से क्योंकि हमें सिर्फ अच्छे नंबर्स चाहिए होते थे। यहाँ पर हो सकता है हम और ज़्यादा सीखने को तैयार रहे होंगे मगर हमें सिर्फ नंबर लाने भर का सीखकर मामले को ख़त्म कर दिया गया।

इस गलती को मापने का कोई पैमाना भी नहीं है कि इस छोटी सी गलती से कितना बड़ा नुकसान होने वाला है हमारे भविष्य में हमें।

उस समय तो हम अच्छे नंबर लेकर लोगों की नज़र में आ जाते हैं कि हम एक हाई IQ वाले इंसान हैं मगर भविष्य में निर्णय लेने की हमारी क्षमता कभी विकसित ही नहीं हो पाती और अधिकतर मामलों में 10th या 12th कक्षा का टॉपर आगे की पढ़ाई में औसत से भी कम हो जाता है और फिर गुमनामी में खो जाता है।

 

How To Achieve Success After Failures In Hindi

 

Angela Duckworth जो कि Professor of Psychology हैं University of Pennsylvania में, उन्होंने इस समस्या को समझने के लिए एक बुक लिखी जिसमे उन्होंने उस

पैमाने को बताया जिससे हम ये जान सकते हैं कि क्यों कोई इंसान भविष्य में सक्सेस पायेगा या नहीं और How To Achieve Success After Failures  , इस बुक का नाम है

GRIT – The power of passion and perseverance.

 

GRIT एक स्कोर प्रणाली है जिसमें इंसान की मनोदशा और उसके बचपन से सम्बंधित कुछ प्रश्न पूछे जाते हैं और फाइनल स्कोर ये बता देता है कि जो काम आप कर रहे हैं उसमे

सक्सेस होंगे या नहीं। How To Achieve Success After Failures.

 

Angela ने अपनी पूरी रिसर्च ही सिर्फ इस बात को पता लगाने में की है कि क्यों हाई IQ वाले लोग अपनी ज़िंदगी में नाकाम होते हैं जबकि कम IQ वाले सक्सेस पा जाते हैं।

Angela ने अपनी रिसर्च शुरू की वेस्ट पॉइंट नामक एक शिक्षण संसथान से जो अमेरिका में है।

वेस्ट पॉइंट में दाखिला पाने के लिए छात्र 2 साल की तैयारी करते हैं, उसके बाद उनके एकेडेमिक्स और शारीरिक क्षमता देखने के बाद ही इस मिलिट्री शिक्षण संसथान में दाखिला मिलता है।

इस कठिन प्रतियोगिता में काफी छात्र बीच में ही संस्थान छोड़ देते हैं मगर क्यों इसका पता लगाने के लिए GRIT का इस्तेमाल किया गया। इसमें पूछे जाने वाले सवाल काफी आसान से होते हैं

जैसे “क्या मैं जो काम शुरू करता हूँ उसे ख़त्म भी कर पाता हूँ ?” या फिर “क्या मैंने अपनी लाइफ में कोई ऐसी चीज़ की है जिसे कठिनाइयों के बावजूद मैंने कर दिखाया ?” इत्यादि।

 

2004 में इस GRIT स्कोर का पहली बार ट्रायल हुआ जिसमे वेस्ट पॉइंट के 1218 छात्रों ने हिस्सा लिया। उस साल 71 छात्रों ने संसथान बीच में ही छोड़ दिया। कमाल कीबात ये है कि GRIT स्कोर पहले ही बता चुका था कि वे संस्थान को अपनी ट्रेनिंग पूरी करने से पहले ही छोड़ देंगे। अगले साल दोबारा से ये स्टडी की गई और 62 छात्रों नेसंसथान को छोड़ दिया। ये भी उनका GRIT स्कोर पहले ही बता चुका था।

 
 

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How to get Success After Lots of Failure

 
 

तो आइये जानते हैं कुछ 3 अहम् तथ्य जिनसे हम ये जान पाएंगे कि ऐसा अनुमान लगाया कैसे गया ?
 

1 – Effort is greater than talent –

 
सार ये है कि “कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती” जब किसी बच्चे को बचपन से ये पता होता है कि उसके अंदर टैलेंट भरा पड़ा है तो वो काफी निश्चिन्त हो जाता है कि वो उस काम को आराम से कर सकता है मगर क्या बिना कोशिश किये किसी काम को करना मुमकिन है?

किसी काम को करने के लिए पहले कोशिश की जाती है तभी वो काम पूरा होता है। खरगोश और कछुए की कहानी इस बात को सार्थक करती है। खरगोश बीच रास्ते में सो जाता है क्योकि उसे पता था कि तेज दौड़ना उसका टैलेंट है जबकि कछुआ लगातार कोशिश किये जा रहा था और आखिर में टैलेंट न होने के बावजूद वो कछुआ ही रेस जीत जाता है।

तो टैलेंट ही सबकुछ नहीं होता उसे साबित करने के लिए कोशिश करनी पड़ती है। इसे नीचे दिए गए आसान फॉर्मूले से समझने की कोशिश करते हैं :-

Skill = Talent * Effort
 
Achievement = Skill * Effort

 

यहाँ पर Skill और Achievement दो अलग अलग भाग हैं किसी काम के पूरे होने में और यहाँ Effort दोनों जगह आता है जबकि Talent सिर्फ एक जगह। इसलिए Effort हमेशा टैलेंट पर भारी पड़ता है।

 

2 – Wise Parents : –

 
हमारी ज़िंदगी में हम सफल होंगे या असफल ये हमारे अपने माता पिता के साथ रिश्तो की घनिष्ठता पर भी निर्भर करता है। हमारे माता पिता हमें किस तरह से पालते हैं ये पूरी तरह से जिम्मेदार है हमारी ज़िंदगी की सफलता में। माता – पिता 4 प्रकार के होते हैं :-

  •   A – Wise Parents :-

     
    इस श्रेणी के पेरेंट्स अपने बच्चों को लगातार सुधार करने के लिए प्रेरित करते हैं साथ ही उनमे दुलार की एक महक होती है। ये नीचे दिए गए वाक्य से साबित होता है :

“तुम कुछ बड़ा करने के लिए पैदा हुए हो और तुम ये कर सकते हो, बस थोड़ा और मेहनत करने की ज़रूरत है, बस हार मत मानियो”

  • B – Authoritarian Parents :-

     
    इस श्रेणी के पेरेंट्स अपने बच्चो से बहुत ज़्यादा एक्सपेक्टेशंस रखते हैं मगर दुलार उसमे ना के बराबर होता है, उनके द्वारा कहे गए वाक्य कुछ इस तरह होते हैं:

“तुम्हे इस काम को करना होगा, जल्दी से करो”

 

  • C – Permissive Parenting :-

     
    इस श्रेणी के पेरेंट्स अपने बच्चों से कोई हाई एक्सपेक्टेशन नहीं रखते मगर दुलार उनमे कूट कूट कर भरा होता है, इस वाक्य को पढ़ें :

“यार तुम अपनी ज़िंदगी में कुछ न कुछ तो कर ही लोगे, हार मत मानियो”

 

  • D – Negligible Parenting :-

     
    इस श्रेणी के पेरेंट्स अपने बच्चो के भविष्य के प्रति लापरवाह होते हैं, उन्हें अपनी ज़िंदगी के अलावा किसी की ज़िंदगी से कोई मतलब नहीं होता। नीचे दिए गए वाक्य से समझने की कोशिश करें:

“मुझे कुछ नहीं पता, अपना काम खुद किया करो”

अब अगर आप तुलना करेंगे तो पाएंगे कि जिस बच्चे के माता पिता A केटेगरी के हैं वो जाहिर तौर पर अपनी ज़िंदगी में कुछ न कुछ बड़ा ज़रूर कर लेगा।

 

 

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3 – Effort without feedback will lead you no where –

 
Angela रोज़ सुबह रनिंग करने जाती थी और ऐसा वो पिछले दो सालों से लगातार कर रही थी। लेकिन उसे उसकी दौड़ने की रफ़्तार में ज़रा भी वृद्धि महसूस नहीं हुई। जबकि आमतौर पर हम रोज़ जो काम करते हैं उसमे माहिर हो जाते हैं।

आपने शायद 10000 घंटे के नियम के बारे में पढ़ा हो, जिसमे ये बताया गया है कि अगर हम किसी काम को 10000 घंटे की प्रैक्टिस करते हैं तो उसमे माहिर हो जाते हैं, लेकिन इस बुक की लेखक Angela ऐसा नहीं सोचती क्योंकि ये पूरा सच नहीं है।

और ये बात फिर Angela ने Enders Erricssion से पूछी, Enders एक world expert हैं जिनका काम दुसरे expert लोगों को स्टडी करना है। Enders ने Angela से कुछ नीचे लिखे हुए सवाल पूछे :-

Enders – जब तुम भागने जाती हो तो तुम्हारा कोई GOAL होता है ? जैसे कि इतना डिस्टेंस इतने समय में पूरा करना है ?

Angela – नहीं तो।

Enders – क्या तुम रनिंग करते वक़्त अपना रूट चेंज करती हो ? जैसे कि हिल्स में भागना ताकि तुम खुद को चैलेंज कर पाओ ?

Angela – नहीं

Enders – तब तुम रनिंग करते वक़्त क्या करती हो ?

Angela – मैं गाने सुनती हूँ या पॉडकास्ट सुनती हूँ ताकि खुद को डाइवर्ट कर सकूं।

 

Enders – तब तुम कभी इम्प्रूव नहीं कर सकती। बिना किसी GOAL सेटिंग के या फीडबैक के तुम कभी अपनी परफॉरमेंस को इम्प्रूव कर ही नहीं सकती। एफर्ट के साथ साथ फीडबैक बहुत मायने रखता है अपनी लाइफ में सक्सेस होने के लिए।

 

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How do you become successful after failure

 

उदाहरण के लिए एक कंप्यूटर प्रोग्रामर एक रेडियोलाजिस्ट से जल्दी सीखता है क्योंकि उसे अपने काम का फीडबैक तुरंत मिल जाता है जबकि रेडियोलाजिस्ट को उसके काम के फीडबैक का इंतज़ार करना पड़ता है।

 

तो दोस्तों, ये रहीं कुछ खास 3 बातें बुक GRIT से। आशा करता हूँ आपको मेरा ये How To Achieve Success After Failures in Hindi पोस्ट पसंद आया होगा। फिर मिलते हैं एक नई जानकारी के साथ।

धन्यवाद!

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