Corona virus

बचपन से हमेशा एक कहावत सुनते आये हैं, “मौत का खौफ, जीना सीखा देता है।” उसे आजकल मैं चरित्रार्थ होते रोज़ देख रहा हूँ। Unlock 1 जबसे शुरू हुआ है या उससे थोड़ा सा पहले से ही सड़कों पर सुबह शाम लोगों की भीड़ थोड़ी सी बढ़ सी गई है और ये आम भीड़ नहीं है, ये वो भीड़ है जिसने Coronavirus से पहले का जीवन AC Room में बैठकर, मोमोस-पिज़्ज़ा खाकर, Twitter पर अपनी भड़ास निकल कर बिताया है।

मगर आजकल इन सबका ह्रदय परिवर्तन हो चुका है, अब ये सुबह शाम वर्जिस में लगे हुए हैं। खूब पसीना बहा रहे हैं ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सके और ये Coronavirus से होने वाली मौतों की गिनती से बाहर रह जाएं। सबसे पहले तो मैं इन लोगों को बधाई देना चाहूंगा कि देर सबेर कम से कम इनके दिमाग की बत्ती तो जली चाहे उसका कारण Coronavirus का डर ही क्यों ना हो।

 

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अगर आप लोग भी नोटिस करेंगे तो ऐसा शर्तियां आपके गली, मोहल्ले, कॉलोनी, बस्ती, गांव व् कस्बों में भी हो रहा होगा। लोग अब समझ गए हैं कि अगर अपने शरीर रुपी मंदिर जिसमे वो बरसों से गन्दगी उड़ेलते आये हैं का ख्याल नहीं रखा तो आगे डगर बहुत मुश्किल है।

आइये जानते हैं कि स्वस्थ रहने और अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हम क्या और कैसे कर सकते हैं ।
 

Corona
Coronavirus in India
 

Coronavirus से लड़ने के तरीके :-

1 – लम्बी दौड़ :-

 

Marathon
Corona virus fight back
with Marathon

“Slow and steady always wins the race” ये कहावत वैसे तो उस कछुए के लिए कही गई है जो खरगोश से रेस जीत चुका था मगर ये एक सच्चाई भी है। धीरे धीरे शुरू करिये क्योंकि दौड़ने से अच्छा कोई व्यायाम हो ही नहीं सकता। ऐसा इसलिए क्योंकि मनुष्य दौड़ने के लिए ही पैदा हुआ है इसलिए उसे प्रकृति ने सरपट दौड़ने के लिए 2 पैर दिए हैं।

रोज़ कम से कम 4 किलोमीटर दौड़िये, रफ़्तार 8 -10 किलोमीटर प्रतिघंटा की रखिये, पसीना बहाइये, फिर देखिएगा की आप के चेहरे का तेज दूसरों को कैसे आकर्षित करता है। अगर आप शारीरिक रूप से सक्षम हैं और आपको कोई तकलीफ नहीं है फिर भी अगर आप दौड़ नहीं रहे हैं तो आप एक पेड़ से अधिक कुछ नहीं हैं।

अगर आप ताउम्र बिना दौड़े रह सकते हैं, तो इसका मतलब ये है कि आप के पैदा होने के कोई मायने नहीं बचे। ये दुनिआ इतनी बड़ी है कि उसको घूमा जाना ही ज़िन्दगी का मकसद होना चाहिए। घुमक्कड़ी से बड़ा कोई धर्म नहीं होता और घुमक्कड़ से बड़ा कोई ज्ञानी नहीं है।

 

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2 – साइकिलिंग :-

 

Cycling compition
Coronavirus fight back with Cycling compition

इससे बेहतर और कोई एक्सरसाइज क्या होगी, मैं खुद लगभग 15 किलोमीटर साइकिल रोज़ चलाता हूँ। एक दिन में अगर आप रोज़ 10 किलोमीटर साइकिल चला लेते हैं तो लगभग 600 -700 किलो कैलोरी ऊर्जा खर्च होती है जोकि एक अच्छी मात्रा है।

आप चाहें तो कोई application भी डाउनलोड कर सकते हैं play store से ताकि रोज़ की एक्टिविटी का डाटा उसमे एकत्र हो सके। ये डाटा आपको आपकी रोज़ की परफॉरमेंस को बेहतर करने में सहायता करती है, साथ ही आप कभी बोर नहीं होते।

क्योकि प्रतिस्पर्धा करना इंसान की फितरत है चाहे वो खुद से हो या किसी दूसरे व्यक्ति से। जिन व्यक्तियों को घुटनो की कोई चोट लग चुकी है दौड़ते समय तो उनके लिए साईकिल चलाना सबसे बेहतर विकल्प है।
 

3 – नाचना :-

 

Dancing
Coronvirus Fight back with Dancing

मनुष्य ही एक ऐसा जिस है जिसे प्रकृति ने खुश होकर नाचने की कला दी है ताकि वो किसी रोमांचक पल को खुल कर जी सके और नाचकर उस ख़ुशी को जाहिर कर सके। इसके साथ साथ नाचना सेहत के लिहाज से अमृत के समान है।

नाचने से शरीर में लचीलापन आता है जिसके लिए लोग ना जाने कितने जतन करते हैं। नाचना, योग का ही एक रूप है जो शरीर के प्रत्येक अंग में आक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने का तरीका है, जिसके फलस्वरूप इंसानी शरीर में लचक बनी रहती है और चोट लगने के मामले कम होते जाते हैं।

बचपन में जब हम कभी खेलते हुए गिर जाते थे तो कुछ नहीं होता था मगर आज बाथरूम में गिर जाने वालों की भी हड्डी टूट जाया करती है, ऐसा होने की सीढ़ी सी वजह है शरीर में लचक की कमी। अगर आप रोज़ 1 घंटा नाचने को अपनी दिनचर्या में शामिल करेंगे तो ये हड्डियों और मांसपेशियों से समस्या से मुक्ति तो तय है।

 

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अब बस यही  बचा एक नारा है।
Coronavirus को हराना है।

 

ये तो रहीं  कुछ चुनिंदा एक्सरसाइज जो आपको स्वस्थ रहने के लिए लगभग रोज़ ही करना चाहिए अगर किसी वजह से रोज़ नहीं कर पा रहे हैं तो सप्ताह में 4 दिन तो करनी ही पड़ेगी।

अगर आप इन्हे अपनी दिनचर्या में शामिल करेंगे तभी रोज़ाना कर पाएंगे। शौक तो सिर्फ 4 दिन ही चलते हैं। इनमे से अपनी सुविधानुसार कोई एक एक्सरसाइज पकड़ लीजिये और उसे अपने जीवन में कुछ इस तरह शामिल कीजिये जैसे आप रोज़ सुबह उठकर ब्रश करते हैं।

ये एक्सरसाइज आपके जीवन का जबतक अभिन्न अंग नहीं बनेंगी तबतक बात नहीं बनने वाली।

अक्सर ऐसा होता है कि हम शुरुआत तो ज़ोरों से करते हैं मगर 1 महीने के अंदर बोर हो जाते हैं, इस मानसिक स्थिति से निकले का नुस्खा नीचे पढ़िए।
 

आदर्श ज़रा सतर्कता से चुनिए:-

 
हमारे जीवन में हम अपने आदर्श उनको बना लेते हैं जिनतक पहुंच पाना हमारे बूते से बाहर होता है इसीलिए अक्सर आप कुछ नया करना शुरू तो करते हैं मगर बहुत जल्द ऊबकर उस काम को करना छोड़ देते हैं।

एक्सरसाइज के मामले में हमेशा यही होता है। चाहे वो दौड़ हो, साइकिलिंग हो, डांसिंग हो या फिर जिम जाना हर एक काम को करने से पहले आप एक टारगेट सेट करते हो उसके लिए कोई आदर्श ढूंढते हो, फिर सोचते हो कि एक दिन उसके जैसा मुकाम हासिल करना है।

आप पूरे जोश के साथ शुरू भी करते हो मगर 1 महीना बीतते बीतते यही बात उलटी पड़ जाती है। आपके मन में चलने लगता है कि इतनी मेहनत के बाद भी आप उस आदर्श से अभी भी कोसों दूर हो। आखिर में आप उस एक्सरसाइज को छोड़ देते हो और फिर से वही ज़िन्दगी शुरू हो जाती है।

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इसके लिए एक काम कीजिये अपने आदर्श अपने आस-पास से चुनिए। मान लीजिये आपके मोहल्ले में एक लड़के की कसरत की हुई बॉडी आपको ठीक लगती है भले ही वो अभी सलमान खान जैसा ना भी लगता हो मगर आपसे बेहतर दिखता है तो उसे अपना आदर्श बनाइये।

छोटे छोटे टारगेट आपको आगे बढ़ने में बहुत मदद करते हैं। फिर जब आपका शरीर उस लड़के के आसपास पहुंच चुका हो तो अब अगला टारगेट ढूंढिए। देखिएगा आप कभी अपनी चुनी हुई एक्सरसाइज से बोर नहीं होंगे और मनचाहे रिजल्ट आपको ज़रूर मिल जायेंगे।

सादर नमस्कार

4 thoughts on “Coronavirus के डर से लेकर सेहत की उड़ान तक”

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