Israel-Palestine Conflict

Israel-Palestine Conflict – आखिर क्यों भारत हमेशा इस्राएल से इतने अच्छे संबंध के बावजूद फिललस्तीन का समर्थन करता है? आइए समझते हैं।

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दोस्तों मिडिल East में लंबे से समय से शांति स्थापित करने की कोशिश की जा रही है, अभी तक कुछ खास सफलता नहीं मिली।

कुछ दिन ही हुए हैं, Israel Defence forces और फिलिस्तीन के हमास संगठन के बीच भीषण युद्ध हुआ।

जिसमे दोनों तरफ से casualities हुई।

हालांकि अब संघर्ष विराम की घोषणा हो चुकी है।
 

Israel-Palestine Conflict

 
भारत के लोगों ने जमकर Israel का साथ दिया।

भारतीयों का दो तरफा रुख रहा है।
कुछ भारतीय फिलिस्तीन का समर्थन कर रहे थे।
और कुछ Israel के समर्थन!

भारतीय लोगों का बडा सपोर्ट Israel को मिला पर भारतीय सरकार ने एक बार फिर UN मे फिलिस्तीन का साथ दिया।

भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई जी की समय से ही भारत का साथ फिलिस्तीन को मिलता आ रहा है।

आज हम इस पोस्ट के माध्यम से यही चर्चा करने वाले हैं, कि आखिर क्या वजह है, जो Israel को खुल कर भारत का समर्थन नहीं मिल पाता।
 

# क्यों रहती है भारत की सिर्फ बीच बचाव वाली नीति

United Nations में भारतीय प्रतिनिधि TS TRIMURTI जी का बयान कुछ इस प्रकार है।

“ हम किसी भी प्रकार के हिंसा का विरोध करते हैं, हिंसा में एक भारतीय नागररक की भी मृत्यु हो गई है।

इसके अतिरिक्त भारत Israel द्वारा किए बमबारी का भी पवरोध करता है।

और हमेशा की तरह भारत फिलिस्तीन को मजबूत समर्थन देते हुए, two state solution की मांग करता है।”

 

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• क्या है Two State Solution?

—-Israel फिलीस्तीन के वजूद को ही नकारता है।
और फिलीस्तिन भी Israel को नहीं मानता।

लेकिन संयुक्त राष्ट्र संघ और अधिकतर देश का मानना यह है, कि एक ही जगह दोनों देशों का वजूद रहे।

इसी का समर्थन भारत भी करता है।

Israel और फिलिस्तीन विवाद को हल करने के लिए कई अलग मत हैं।

जिसकी मैं नीचे उल्लेख कर रहा हूं।
 

©• Zero State Solution

ये सबसे extremist विचारधारा का Solution है। एक इजरायली fundamentalist Aryeh king कहते हैं कि सारे Palestinians अरब से आए हैं तो वो अरब चले जाएं।

वहीं फिलिस्तीन के भी extremist विचारधारा के लोग जवाब में ये कहते हैं कि इस्राइली लोग भी यूरोप चले जाएं।

ये सबसे illogical Solution है, जो मुझे नहीं लगता कभी इस्राएल और फिलिस्तीन का विवाद सुलझा पाएगी।
 

©• Three State Solution –

American बुद्धिजीवी डेनियल पाइप्स का कहना है, कि गाजा को इजिप्ट को सौंप देना चाहिए।

और वेस्ट बैंक को जॉर्डन को सौंप देना चाहिए।

इस तरह three State Solution ho जाएगा।

हैरानी की बात है कि इजिप्ट और जॉर्डन दोनों में से कोई इसके लिए तैयार नहीं है।
 

©• One state Solutions :-

Israel-Palestine Conflict के दोनों तरफ के लोगों का मानना है कि इस्राएल और फिलिस्तीन एक देश हो जाए।

लेकिन extremist विचारधारा के लोग फिर यहां सर दर्द बन रहे हैं।
फिलिस्तीनी लोगों को लगता है उन्हे इस्राएल में 2nd class नागरिक की तरह देखा जाएगा।

वहीं इस्राएल के लोगों को भी लगता है। इससे मुस्लिम जनसंख्या इस्राएल में बढ़ जाएगी और उनके संसाधनों पर कब्जा कर लेगी।

कुल मिला कर 2 स्टेट सॉल्यूशन ही सबसे बेहतरीन सॉल्यूशन है। यही वजह है भारत भी इसका समर्थन करता है।

त्रिमूर्ति जी के बयान से स्पष्ट है कि भारत फिलिस्तीन का समर्थन करते हुए, और हमास के रॉकेट हमले की निंदा करते हुए, बीच बचाव करता नजर आया।

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# बेंजामिन नेतन्याहू और प्रधानमंत्री मोदी जी की दोस्ती

भारत रक्षा क्षेत्र में इस्राएल से बहुत ही मजबूत संबंध रखता है।

हाल ही में इस्राइली उपराजदूत ने अपने बयान में कहा है, कि आज भी भारत और इस्राएल के संबंध उतने ही मधुर हैं, जितने पहले हुआ करते थे।
इजरायली प्रधानमंत्री और पीएम मोदी की दोस्ती बहुत ही गहरी है।
 

# कारगिल की लडाई में भी इस्राएल ने भारत की मदद की

भारत रक्षा क्षेत्र में कुछ हद तक Israel पर हमेशा से निर्भर रहा है।
कई radar तकनीक, anti tank guided missile, sniper rocket जैसे महत्वपूर्ण हथियार इस्राएल ने कारगिल युद्ध में भारत को दिए थे।
 

Israel-Palestine Conflict में हम क्यों नहीं दे पाते Israel का साथ?

हमारे संबंध इतने गहरे होते हुए भी भारत Israel का खुल कर समर्थन नहीं कर पाता।

इसकी कई वजह है।

जो हम आगे चर्चा करने वाले हैं।
 

#कूटनीतिक सिद्धांत में भारत का दोहरा मत हो जाना

दोस्तों भारत हमेशा कब्जा की हुई जमीन को अवैध मानता रहा है।

चीन तिब्बत का विवाद हो,
कश्मीर का विवाद हो,
अक्साई चीन का विवाद हो,
या फिर दक्षिण चीन सागर कब्जाने
की चीन का नापाक इरादा हो।

भारत का स्पष्ट् रुख ये रहता है कि वो कभी कब्जाई गई भूमि को सही नहीं मानेगा।

जाहिर है कि 1948 में यहूदी देश Israel  का उदय हुआ था।

इससे पहले वह फिलिस्तीन हुआ करता था।

अगर भारत Israel का खुल कर समर्थन करता है, तो United Nations मेंअपने ही कश्मीर मुद्दे पर फस सकता है।
 

#UNO की स्थायी सदस्यता खतरे में पड सकती है।

कुल 193 देशों में 130 देशों का समर्थन स्थायी सदस्य बनने के लिए चाहिए होते हैं।

ऐसे में भारत Israel का समर्थन करके OIC ( ORGANIZATION OF ISLAMIC CORPORATION) के 57 देशों को नाराज नहीं करना चाहता।

 

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#मिडिल ईस्ट में भारत का व्यापारिक और आर्थिक हित

भारत और Israel का ट्रेड, भारत के कुल व्यापार का 1% है।

जबकि भारत के कुल व्यापार का 18% मिडिल ईस्ट के देशों से भारत का होता है।

साथ ही 55 लाख से भी अधिक भारतीय मिडिल ईस्ट में नौकरी कर रहे हैं।

ऐसे में फिर भारत के लिए आर्थिक हित को देखना भी जरूरी हो जाता है।
 

#कश्मीर विवाद

OIC के अधधकतर देश कश्मीर विवाद में भारत का समर्थन करता है।

ऐसे में भारत के लिए एक बार फिर यहां सामंजस्य बैठा कर चलना उचित लगा।
 



 

#CHINA KO COUNTER करना जरूरी

दर असल अधिकतर खाड़ी देश का भारत के साथ संबंध चीन की अपेक्षा अधिक मधुर है।

ऐसे में चीन UN में Israel के खिलाफ resolution ले आया,ताकि खाड़ी के मुस्लिम देशों को खुश कर दिया जाए।

दरअसल चीन मुस्लिम कार्ड खेल गया, ऐसे में अगर भारत फिलिस्तीन का साथ न देता तो खाड़ी देशों में गलत संदेश जाता।

और वो भारत के लिए सही नहीं होता।

 

तो ये थी वो Israel-Palestine Conflict कूटनीततक वजहें, लेख कैसा लगा हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताइएगा।
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जय हिन्द

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