इंसान इंसान ही रहे

 

इंसान इंसान ही रहे – मेरा नाम सौरभ है और मैं आपका स्वागत करता हूँ आज के अपने इस नए आर्टिकल पर।

 

क्या आप जानते हैं कि चूहा दौड़ क्या होती है ? सीधी और सटीक भाषा में अगर बोलूं तो एक ऐसी दौड़ जिसमे आप चाहे कितनी ही मेहनत क्यों ना कर लें मगर पहुँच कहीं नहीं पाएंगे। फ़र्ज़ कीजिये कि एक शीशे की नली जिसके दोनों मुहाने एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और उस नली में एक चूहा छोड़ दिया जाये तो वो चूहा चाहे कितनी ही दौड़ क्यों न लगा ले हर एक प्रयास के बाद दोबारा वहीँ पहुंच जाता है जहाँ से उसने शुरुआत की थी।

चूहा बना इंसान

लोग भी इसी दौड़ में फसे हुए हैं, पूरे महीने दिन रात मेहनत करके महीने की तनख्वाह का इंतज़ार करते हैं फिर उस तनख्वाह से जिम्मेदारियां खरीदते हैं और फिर अगले महीने की पहली तारीख को उसी जगह ख़ुद को खड़ा हुआ पाते हैं, जहाँ से उन्होंने पिछले महीना शुरू किया था।

क्या ऊब नहीं होती ??? मैं तो ऊब चुका हूँ इसीलिए इस चूहा दौड़ से बहुत जल्द बाहर भी निकल जाऊंगा। चूहा दौड़ के उलट जो चीज़ है उसे फ़ास्ट ट्रैक कहते हैं, जहाँ एक बार पहुंचने के बाद आप अपनी ज़िन्दगी बदल देंगे। चलिए नीचे दिए गए कुछ तथ्यों के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं।

 

हमारी मानसिक अवस्था

 

बचपन से लेकर आजतक हमें एक ऐसी शिक्षा दी गई जो हमें सिर्फ गुलाम बनना सिखाती है। हमसे बस यही अपेक्षा की जाती है कि स्कूल जाओ, नौकरी पाओ और टैक्स भरो। अब सवाल ये है कि हम स्कूल जाते ही क्यों हैं? जवाब है ताकि नौकरी मिलने की भ्रष्ट व्यवस्था के लिए काबिल हो सकें।

वो डिग्री जिसकी मदद से हम एक ढेला नहीं कमा सकते उसे आधार बनाया जाता है। असला मुद्दा है मुद्रा, मगर पैसे कमाना कोई नहीं सिखाता। क्योंकि जिस दिन आप पैसे की समझ में पारंगत हो गए, उस दिन सरकार का एक टैक्सपेयर कम हो जायेगा।

सरकारें हमें एक ऐसी मशीन की तरह इस्तेमाल करती हैं जो हर महीने टैक्स के रूप में ज़्यादा से ज़्यादा पैसा उनको दे जिससे उनको और पैसा मिले घोटाला करने के लिए। अगर असल मुद्दा सिर्फ मुद्रा ही है तो हमें सीधे पैसे कमाना सिखाओ। लेकिन ये कदम कोई सरकार नहीं लेने वाली क्योंकि उन्हें सिर्फ गुलाम चाहिए।

 

भ्रष्ट शिक्षा तंत्र का हमारी सोच पर प्रभाव

 

जब आप बचपन से ऐसी भ्रष्ट शिक्षा के इर्द गिर्द बड़े हो रहे होते हैं तो बहुत मुश्किल है इस षड्यंत्र को समझ पाना। सिर्फ एक ही सोच सबके मन में बनने लगती है कि कैसे पढाई पूरी करके जल्दी से जल्दी कोई अच्छी नौकरी पा जाएँ। अगर आप अभी अभी ग्रेजुएट हुए हैं तो नौकरी आपको मिलने से रही क्योंकि जिनकी नौकरी थी भी उनकी जा रही है।

ऐसे में नई नौकरी एक फ्रेशर को मिलना नामुमकिन है। मिलेगी भी तो ऐसी जहाँ आप 3 महीने भी नहीं काट पाएंगे। नियोक्ता आपका शरीर से खून का एक एक कतरा निकल लेगा। और ऊपर से सोने पे सुहागा ये है कि आपको पैसे कामना सिखाया ही नहीं गया सिर्फ पैसे के लिए काम करने के लिए तैयार किया गया है। और आपको ये पता भी नहीं चलता कि आप एक गुलाम से ज़्यादा कुछ नहीं हैं।

 

चूहा दौड़ की शुरुआत

 

जिस दिन आपको नौकरी मिल जाती है उसी वक़्त से आप चूहा दौड़ में शामिल हो जाते हैं। पूरे महीने गधों की तरह काम करते हैं जबकि अमीर कोई और हो रहा होता है। आपको मिलता है एकमुश्त पैसा जिसकी वैल्यू दिन पर दिन वैसे भी कम होती रहती है। महीने की पहली तारीख से आप दौड़ना शुरू करते हैं, ठीक 30 दिन के बाद जब आपको तनख्वाह आती है आप अपनी ज़रूरत के अनुसार उन्हें खर्च कर देते हैं, फिर शामिल हो जाते हैं उस चूहा दौड़ में अगले महीने के लिए।

आपको सोच संकुचित हो चुकी होती है, आपको यक़ीन हो जाता है कि अगर पैसे चाहिए तो काम करना पड़ेगा। मगर ज़रा अपनी कंपनी के मालिक की जगह खुद को रखकर देखिये। क्या वो आपकी तरह काम करता है ?? जी नहीं वो काम करवाता है और अमीर बनता है जबकि आप हर पहली तारीख को वहीँ खड़े होते हैं जहाँ से दौड़ना शुरू किया था।

 

इस चूहा दौड़ से कैसे बचा जा सकता है ?

 

Robert Kiyosaki अपनी बुक Rich Dad Poor Dad में लिखते हैं कि सिर्फ एक ही तरीका है और वो है पैसे के लिए काम ना करना। जब वो छोटे थे तो उसके Rich Dad उनसे दिन रात काम करवाते थे मगर एक भी पैसा नहीं देते थे, इसका रिजल्ट ये हुआ कि मुफ्त में काम करने की वजह से उनके मन में पैसे कमाने के नए नए आइडियाज उभरने लगे और उनका दिमाग इस तरह से सोचने के लिए मजबूर हो गया कि पैसे कैसे बनाये जा सकते हैं।

If you are young, work to learn not to earn ये ही एकमात्र मन्त्र है जिसकी मदद से आप इस चूहा दौड़ से बच सकते हैं। प्रकृति ने हमारा दिमाग कुछ इसी तरह से डिज़ाइन किया है, जब उसे किसी चीज़ की ज़रूरत होती है तो उसे पाने के नए तरीके इज़ाद करने लगता है। अगर आपने काम के बदले पैसे लेना शुरू कर दिया तो आपका दिमाग ऐसे आईडिया कभी नहीं बनाने वाला।

इसलिए, अगर आप अभी अभी ग्रेजुएट होकर निकले हैं तो कहीं मुफ्त में काम करना शुरू करिये, 3 महीने के अंदर आपका दिमाग अपने आप एक नया आईडिया आपको निकल कर दे देगा जिसकी मदद से आप पैसे बनाना सीख जायेंगे।

 

इंसान इंसान ही रहे  ! !

 

चूहा दौड़ से कैसे निकल सकते हैं?

 

अगर आप मेरा ये आर्टिकल पढ़ रहे हैं और चूहा दौड़ में फसे हुए हैं तो भी परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। George S. Clason अपनी बुक The Richest Man in Babylon में लिखते हैं कि हर महीने अपनी कमाई का 10% जोड़ना शुरू कीजिये जब ज़रूरत भर का पैसा इकठ्ठा हो जाये तो उसे इन्वेस्ट कीजिये,

धीरे धीरे जब उन इंवेस्टमेंट्स से आपको हर महीने इतनी कमाई होने लगे जिससे आपकी महीने भर की ज़रूरतें पूरी हो सकती हैं तो मुबारकबाद आप चूहा दौड़ से बाहर निकल चुके हैं। अब आप फ़ास्ट ट्रैक पर हैं, जहाँ पर आपके पास भरपूर समय है अपने खुद के बिजनेस को ज़माने का।

 

चूहा दौड़ से निकलने के बाद क्या करें और इंसान इंसान ही रहे

 

एक बार जब आप चूहा दौड़ से बहार निकल जाते हैं तो आपके पास दुनिया की सबसे अनमोल चीज़ होती हैं, वो है समय। इस बहुमूल्य समय को किसी ऐसे काम में लगाइये जहाँ से आप बिना काम किये और पैसे कमा सकते हैं। अपने पसंद का कोई काम शुरू करिये, उसे और अपग्रेड कीजिये। दुनिया आपके कदमों में होगी।

आशा करता हूँ आपको मेरा ये इंसान इंसान ही रहे आर्टिकल पसंद आया होगा। कमेंट करके जानकारी दे ।

तब तक के लिए इंसान इंसान ही रहे

सादर नमस्कार!

 

 

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