India and Nepal Border

नेपाल भारत सीमा विवाद – मेरा नाम सौरभ है और मैं आपका स्वागत करता हूँ अपने इस नए आर्टिकल पर।जैसा कि आप सभी को खबर मिल रही होगी कि नेपाल और भारत के बीच नेपाल भारत सीमा विवाद मुद्दा चल रहा है,और नेपाल आँखें क्यों दिखा रहा है ? 2020 में

हालांकि नेपाल और भारत के बीच सीमा जैसी कोई चीज़ वैसे भी ना के बराबर है, दोनों ही देशों के लोग बिना किसी रोक टोक इधर उधर आ जा सकते हैं तथा किसी वीज़ा की ज़रूरत भी नहीं पड़ती है।

आप सभी ने देखा होगा की बहुत सारे नेपाल के लोग हमारे घरों के आसपास रहते भी हैं और काम धंधा भी करते हैं। मगर अचानक से ऐसा क्या हो गया कि पूरे नेपाल में भारत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और नेपाल की संसद ने अपना नया नक्शा पारित कर दिया जिसमे 300 वर्ग किलोमीटर का एरिया अलग से जोड़ा गया दिख रहा है ??ये है नेपाल भारत सीमा विवाद

 

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आज हम बात करेंगे नीचे लिखे कुछ प्रश्नो के ऊपर जो आपके मन में भी ज़रूर उठ रहे होंगे:और नेपाल भारत सीमा विवाद। नेपाल आँखें क्यों दिखा रहा है ? 2020 में का जवाब  देंगे.

  1. नेपाल भारत सीमा विवाद आखिर है क्या ?
  2. नेपाल भारत सीमा विवाद कब से चल रहा है ?
  3. नेपाल में भारत को लेकर क्या मानसिकता है ?
  4. भारत की इसके आगे की रणनीति क्या होनी चाहिए ?

समय में ज़रा पीछे चलते हैं, साल 1815 नेपाल और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच घमासान युद्ध हुआ। गोरखा साम्राज्य ने जमकर अंग्रेजों का मुकाबला किया मगर कोई निर्णय नहीं निकला।

फिर अंग्रेजों और नेपाल के तत्कालीन राजा के बीच संधि हुई जिसे सगौली संधि कहा जाता है, उस संधि में अपनी अपनी सीमाओं को तय किया गया।

नेपाल को पश्चिम में काली नदी तथा पूरब में मेछी नदी के बीच का हिस्सा रखने दिया गया, सिक्किम और दार्जिलिंग वाला भाग उसे अंग्रेजों को देना पड़ा।

अब समस्या ये है कि पश्चिम के काली नदी को ही सीमा मानी गई थी मगर जैसा कि आप नीचे दिए गए चित्र में देख पा रहे हैं कि काली नदी (शारदा नदी) गूंजी नामक स्थान पर दो हिस्सों में बट जा रही है तथा मुख्य धारा के हिसाब से वो त्रिकोणीय हिस्सा नेपाल अपना मानता है।अंग्रेजों ने नेपाल के तरफ की दूसरी धारा को सीमा माना। ये विवाद तबसे चला आ रहा है मगर ज़्यादा किसी ने ध्यान नहीं दिया।

चित्र-1

 

shadra rever नेपाल भारत सीमा विवाद
shadra river of nepal annd India
चित्र-2
Kaali River
Kaali (Sharda) River

भारत ने पिछले 150 सालों से वहां अपनी सैन्य चौकियां बना रखी हैं और ऐसा उस समय के नेपाली राजा की सहमति से किया गया था ताकि दोनों तरफ के लोग उस जगह का इस्तेमाल कर सकें और साथ ही भारत नेपाल बॉर्डर जो चीन से लगती हैं की सुरक्षा भी हो सके।

ऐसा अभी तक ठीक ठाक चलता रहा लेकिन समस्या तब शुरू हुई जब हाल ही में भारत ने लिपुलेख दर्रे तक 80 किलोमीटर की नई सड़क बना ली जो कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए बनाई गई है, पहले ये यात्रा सिक्किम की तरफ से होती थी जहाँ से लोग तिब्बत में दाखिल होते थे और 15 दिन का ट्रेक करना पड़ता था, मगर अब ये सिर्फ 3 दिनों में हो जाया करेगा।

 

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नेपाल में जनता को जब इसकी जानकारी हुई तो हंगामा शुरू हो गया, संसद के सामने मार्च होने लगे। नेपाल के प्रधानमंत्री ने नया नक्शा भी पेश कर दिया जिसमे वो हिस्सा नेपाल में दिखाया है।

यहाँ तक कोरोना को लेकर भारत पर एक विवादित बयान तक दे डाला। भारत के हिसाब से उस हिस्से का इस्तेमाल वो सालों से करता आ रहा है और वो उसकी ही सीमा में आता है जैसा अंग्रेजों ने भारत से जाते समय के रिकार्ड्स में लिखित रखा है।

चित्र 3
political image of Nepal
Source- google image

हाल ही की मेरी नेपाल यात्रा में मैंने कई सारे अनुभव किये जो आज आपके सामने रखने जा रहा हूँ। ये मेरे अपने विचार हैं जो कि मेरे अनुभव पर आधारित हैं। हर देश की तरह नेपाल के भी अपने आंतरिक मसले हैं जिनमे गोरखा और मधेशियों के बीच का मसला अहम् हैं।

भारत नेपाल बॉर्डर ,नेपाल में लगभग 30 किलोमीटर का मैदानी इलाका है जो भारत से लगा हुआ है। नेपाली लोग इन मैदानी इलाको में रहने वालों को मधेशी या मध्य देशी कहते हैं तथा हीन भावना रखते हैं।

इन मधेशियों के सगे संबंधी भारत में भी रहते हैं इसलिए इनका झुकाव भारत की ओर काफी है, इसीलिए वहां इनको प्राचीन नेपाल का निवासी मानने से इंकार किया जाता है।

 

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जब तक नेपाल में माओवादियों की सरकार रही भारत और नेपाल के रिश्ते मधुर बने रहे क्योकि मधेशी बहुत बड़ा रोल अदा करते हैं माओवादियों की सरकार में।

मगर हाल ही में जब से नेपाल में कम्युनिस्टों की सरकार बनी है तो पहाड़ी हिस्से में चीन के प्रति रुझान देखने को मिलता है।

ख़ास नेपाल के लोग भारतियों को नापसंद करते हैं बशर्ते कि आप टूरिस्ट ना हों। जब तक आप टूरिस्ट हैं, आपको सर आँखों पर रखा जायेगा अन्यथा उनका बर्ताव बदल जाता है।

खास नेपाल के लोग खुद को मंगोल मानते हैं, उनका मानना है कि उनके पूर्वज चंगेज़ खान के भारत पर आक्रमण के समय यहाँ आये और यहीं बस गए।
इस बात के सबूत पूरे नेपाल की सड़कों पर घूमते हुए आपको मिल जायेंगे। हर सड़क पर आपको ‘जय मंगोल” का उद्घोष करते नारे लिखे मिलते हैं। इसलिए वो मधेशियों को दूसरे दर्जे का नागरिक मानते हैं।

मंगोलिया जो भौगोलिक रूप से चीन से जुड़ा हुआ है, रहन सहन और संस्कृति के मामले में एक दुसरे के बेहद करीब हैं। इसी नाते चीन के प्रति खास नेपाल का झुकाव भी लाज़िम है।

मेरे ख्याल में ये बहुत ही नाज़ुक मामला है, भारत की विदेश नीति के मुताबिक वो एक धर्म निरपेक्ष, संप्रभु और गुट निरपेक्ष राष्ट्र है। हमारी विदेश निति हमें किसी देश की भूमि को हथियाने का हक़ नहीं देती और आज़ादी से लेकर आजतक भारत ने ऐसा किया भी नहीं है ना ही कर सकता है।

गलती कहाँ पर हुई? ये गौर करने वाली बात है कि जब सड़क का प्रस्ताव रखा गया था तो नेपाल सरकार से राय ली जा सकती थी क्योंकि वो एक विवादित भूमि पहले से थी। क्योकि भारत और नेपाल में कभी कोई फर्क रहा ही नहीं इसलिए दोनों तरफ के लोग उस सड़क का इस्तेमाल कर सकते हैं। इतनी सी बात पर कोई हल्ला नहीं होता।

 

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खैर, जो नहीं हुआ वो ठीक नहीं किया जा सकता मगर यहाँ भारत को एक बड़े भाई की भूमिका में आकर नेपाल का विश्वास प्राप्त करना ही होगा।

पहले से ही हमारे सम्बन्ध पड़ोसियों से कोई खास नहीं रह गए हैं, नई शुरुआत करके स्थिति सुधारने की ज़रूरत है क्योंकि हिन्द महासागर में चीन की बढ़ती ताकत को देखते हुए ऐसा करना ज़रूरी है।

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपाई जी ने भी कहा था कि हम सब कुछ बदल सकते हैं, मगर पड़ोसी नहीं।

उम्मीद है की आप सबको नेपाल भारत सीमा विवाद। नेपाल आँखें क्यों दिखा रहा है ? 2020 में पसंद आया होगा. कृपया Comment Box में आप भी अपने विचार प्रस्तुत कर सकते है।

सादर नमस्कार!

5 thoughts on “नेपाल भारत सीमा विवाद । नेपाल आँखें क्यों दिखा रहा है ? 2020 में”
  1. Ye sirf communist party ki wajah se ho rha hai , srilanka ka jhukav bhi pehle china ki aur gaya lekin satta parivartan hone ke turant bad sthiti bharat ke paksh me a gayi , communist koi na koi bahana dhudh lenge china se judne ka esliye ye sb bahana hai actual me logo ke man me iss tarah ki dhadhna nhi hai nepal me

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