चीन

मेरा नाम सौरभ है और आज मैं लेकर आया हूँ एक ऐसा टॉपिक चीन कैसे बन गया एक आर्थिक महाशक्ति ? जो दिमाग की बत्ती जला देगा।

क्या आपको पता है 1960 के दशक में भारत (India) और चीन (China) की जीडीपी (GDP) लगभग बराबर थी और जनसंख्या के हिसाब से देखा जाये तो प्रति व्यक्ति आय भी। मगर 1974 आते आते चीन अचानक से गति पकड़ लेता है और देखते ही देखते आज हमसे 4 गुना बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।

दुनिया में चीन दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है अमेरिका के बाद। जहाँ भारत की अर्थव्यवस्था मात्र 2.9 ट्रिलियन डॉलर की है वहीँ चीन 14.2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन चुका है। चलिए जानते हैं कुछ तथ्य कि कैसे एक देश जो हमारे साथ साथ ही आजाद हुआ था आज हमसे 4 गुना आगे निकल गया है और क्या हम कभी उसको पछाड़ पाएंगे??

सबसे पहले जानते हैं कि :-

चीन कैसे बन गया एक आर्थिक महाशक्ति
चीन  महाशक्ति

 

चीन कैसे बन गया एक आर्थिक महाशक्ति ?

 

1 – इंफ्रास्ट्रक्चर

दुनिया के बड़े बड़े विद्वान् कह गए कि तरक्की करनी है तो सड़क बनाओ। हमने तो सुना नहीं मगर हाँ पडोसी के कान में बात पड़ गई। अगर आप निचे दिए गए चित्र को ज़रा सा गौर से देखेंगे तो आपको इसका उत्तर मिल जायेगा।

जहाँ चीन में गहरी पीली रेखाएं उनकी बड़ी बड़ी सड़कों को दर्शा रही हैं, वहीं अपने भारत में महज़ एक सड़क जो लखनऊ से दिल्ली को जोड़ती है उसको ही देखा जा सकता है।

चीन ने अपने देश में चौड़ी चौड़ी विश्व स्तरीय सडकों के जाल बिछा दिया है। ज़ाहिर सी बात है जब आपके देश में आवागमन की इतनी बेहतरीन सुविधा उपलब्ध होगी तो कच्चे माल के आवागमन में समय बचेगा, सड़कों पर गड्ढे ना होने की वजह से गाड़ियां कम ख़राब होंगी, ईंधन की खपत कम होगी और जान माल की सुरक्षा रहेगी। ऐसी आदर्श स्थितिओं में कौन सी कंपनी अपनी फैक्ट्री वहां नहीं लगाना चाहेगी?? और यही हुआ।

चीन आर्थिक महाशक्ति
चीन आर्थिक महाशक्ति

 

2 – सस्ती लेबर –

1991 का अगर हम डाटा उठाएं तो हमें पता चलता है कि उस वक़्त चीन की प्रति व्यक्ति आय थी सिर्फ 333 डॉलर प्रति वर्ष और कमाल की बात तो है कि भारत में भी उस समय प्रति व्यक्ति आय 303 डॉलर प्रति वर्ष थी। यानि कि लगभग बराबर। मगर 2018 के डाटा पर अगर हम नज़र डालते हैं तो चीन की प्रति व्यक्ति आय है 9771 डॉलर प्रति वर्ष जबकि भारत आज भी महज़ 2016 डॉलर प्रति वर्ष रिपोर्ट कर रहा है।

यानी की पिछले 30 सालों में चीन की प्रति व्यक्ति आय हमसे लगभग 5 गुनी हो गई। ये बात दिल पर लगी है आपके, मुझे एहसास है मगर यही बात हमें एक मौका भी देती है। 30 साल पहले कंपनियों ने अगर चीन में अपने कारखाने लगाए तो उसका बहुत बड़ा कारण था, सस्ती लेबर। मगर आज के समय में वहां लेबर महँगी हो चुकी है जबकि भारत में अभी वो बहुत निचले स्तर पर है। जब लोगों की आय बढ़ती है तो उनका जीवन सस्तर सुधरता है और वो पैसे ज़्यादा खर्च करने लगता है।

और ये बात आप भी मानेंगे कि एक बार महीने का खर्च बढ़ने के बाद कभी कम नहीं होता। क्योंकि जिसकी जितनी कमाई होती है उतने ही खर्चे अपने आप खड़े हो जाते हैं।

 

3 – हब मॉडल –

चीन ने अपने हर एक शहर को इस तरह विकसित किया है जैसे वो शहर किसी एक प्रकार के सामान को बनाने के लिए ही जाना जाता है। उन्होंने अपने एक शहर हो पकड़ा और किसी एक इंडस्ट्री के लिए एक ही स्थान पर सारा कच्चा माल मुहैया कराने की सुविधा दे दी। जैसे Shenzhen शहर को उन्होंने इलेक्ट्रिक उपकरणों के मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित किया, शंघाई को उन्होंने ट्रेडिंग के लिए। अब इसका फायदा क्या होता है ?? मोबाइल फ़ोन को ही ले लीजिये।

एक मोबाइल फ़ोन को बनाने में अलग अलग तरह के पार्ट्स की ज़रूरत होती है, जैसे डिस्प्ले, बैटरी, मदर बोर्ड इत्यादि। अब अगर ये सब चीज़ें देश के अलग अलग कोने से मांगनी पड़ें तो प्रोडक्ट कॉस्ट बहुत बढ़ जाएगी। और अगर ये सब चीज़ें आस पास की मार्केट से ही उपलब्ध हो जाएं तो खर्च कम आएगा, कम समय में ज़्यादा काम हो पायेगा और प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी।

4 – बिजनेस के लिए माहौल –

भारत में आज अगर आप एक छोटा सा ही सही बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो इतने कागज़ात आपसे मांग लिए जाते हैं कि आप उनकी डिमांड पूरी ही नहीं कर पाएंगे। पूरी कर भी लेंगे तो सरकारी दफ्तर में बैठा निठल्ला बाबू बिना अपनी जेब गर्म किये आपकी फाइल आगे नहीं बढ़ाने वाला। एक लोन लेना हो तो दुनिया भर की गारंटी दीजिये।

अमा अगर गारंटी देने के लिए होती तो इंसान लोन लेने काहे जाता?? मान लीजिये आपने ये सब बाधाएं पार भी कर लीं फिर टैक्सेशन के चक्कर में ऐसा उलझेंगे कि अपने काम पर ध्यान ही नहीं दे पाएंगे और होगा ये कि आपका बिजनेस औंधे मुँह गिर चुका होगा। चीन में इतनी जटिल प्रक्रिया नहीं है। एक आध फार्म भरकर आप अपना काम शुरू कर सकते हैं, सरकारें नौकरी देने से ज़्यादा, नौकरी पैदा करने वालों को प्रोत्साहित करती हैं, घूसखोरी दुनिया के हर एक कोने में है क्योंकि ये हमारे DNA में बस चुकी है तो मुझे नहीं लगता वहां किसी को घूस नहीं देनी पड़ती होगी। ये हर जगह व्याप्त है, कहीं कम तो कहीं बहुत ज़्यादा। हमारा देश दूसरी केटेगरी में है।

5 – हुनरमंद लेबर –

मैं अगर अपनी बात करूँ तो मेरी ग्रेजुएशन की डिग्री मेरे लिए टॉयलेट पेपर से ज़्यादा कुछ नहीं है, उसकी मदद से मैंने आजतक एक फूटी कौड़ी तक नहीं कमाई। और लगभग ऐसा ही सबके साथ होता है। जो पढ़ाई हमें कराई जा रही है हमारे देश में उसकी हमें कोई ज़रूरत ही नहीं है, वो पहले कभी सार्थक हुआ करती थी इंडस्ट्रियल युग के समय, मगर ये सूचना युग है।

इसमें हमें अलग तरह की शिक्षा की ज़रूरत है जिससे हमें रोजगार के अवसर मिलें। ग्रेजुएशन मन की शांति के अलावा कुछ भी नहीं। कमा आप एक ढेला नहीं पाओगे ये तय है। चीन ने अपने यहाँ ऐसे हुनरमंद व्यक्तियों की फ़ौज खड़ी कर दी। जनसंख्या में तो हम उनका रिकॉर्ड बस कुछ ही सालों में तोड़ देंगे मगर क्या हम उनके जैसे हुनरमंद देश के रूप में बदल पाएंगे??

 

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चीन (China) की जीडीपी (GDP)

रिपोर्ट बताती है कि 1961 से 1978 तक, वैश्विक आर्थिक विकास में चीन का औसत वार्षिक योगदान 1.1 प्रतिशत था, लेकिन 1979 से 2012 तक, औसत वार्षिक योगदान दर 15.9 प्रतिशत थी, जो दुनिया में दूसरे स्थान पर थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2013 से 2018 तक, औसत वार्षिक आंकड़ा 28.1 प्रतिशत तक चढ़ गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018 में वैश्विक आर्थिक विकास में चीन के योगदान का अनुपात 27.5 प्रतिशत, 24.4 प्रतिशत अधिक था।

पिछले 70 वर्षों में, चीन की आर्थिक ताकत उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।

1952 में, चीन की जीडीपी 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी, जबकि 2018 में, इसकी जीडीपी 13.61 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, 452.6 गुना की वृद्धि हुई।

1978 में, चीन की जीडीपी दुनिया में 11 वें स्थान पर थी, जबकि 2010 में, यह जापान को पछाड़कर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई और तब से  चीन एक आर्थिक महाशक्ति बनी हुई है।

 

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चीन आर्थिक महाशक्ति

 

चीन के विदेश व्यापार 2020 में गंभीर चुनौतियों का सामना

वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन का विदेश व्यापार 2020 में गंभीर जोखिम और चुनौतियों का सामना करता है, क्योंकि Novel Coronavirus महामारी के कारण अनिश्चितताएं बढ़ी है।

वैश्विक आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ रहा है, और औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखला सिकुड़ते हुए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश के साथ बाधित हो गई है

घरेलू फर्मों, विशेष रूप से छोटे और मध्यम आकार वाले, बढ़ती कठिनाइयों और बढ़ते रोजगार दबाव का सामना कर रहे हैं।

लेकिन जैसा कि चीन की आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य होती हैं, विदेशी व्यापार और विदेशी निवेश के समग्र प्रदर्शन को स्थिर करने के लिए अभी भी एक ठोस आधार है

आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष के पहले पांच महीनों में चीन का माल का विदेशी व्यापार वर्ष के 4.9 प्रतिशत घटकर 11.54 ट्रिलियन युआन (लगभग 1.63 ट्रिलियन युआन) हो गया।

वैश्विक आपूर्ति और औद्योगिक श्रृंखलाओं को स्थिर करने के प्रयासों के तहत, दक्षिण चीन के गुआंगदोंग प्रांत में 127 वें चीन आयात और निर्यात मेला, या कैंटन फेयर, सोमवार को ऑनलाइन बंद हो गया, जो दशकों पुराने व्यापार मेले के लिए पहली बार बंद हुआ।

इस वर्ष अब तक के प्रमुख वैश्विक व्यापार कार्यक्रमों में से एक के रूप में, 10-दिवसीय ऑनलाइन मेले ने लगभग 25,000 उद्यमों और सैकड़ों हजारों वैश्विक खरीदारों को आकर्षित किया है, जिसमें 1.8 मिलियन उत्पादों का प्रदर्शन किया गया है।

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चीन एक आर्थिक महाशक्ति

तो ये रहीं टॉप 5 वजहें जिनकी कारण चीन कैसे बन गया एक आर्थिक महाशक्ति । इसमें हमें अलग तरह की शिक्षा की ज़रूरत है जिससे हमें रोजगार के अवसर मिलें। ग्रेजुएशन मन की शांति के अलावा कुछ भी नहीं। कमा आप एक ढेला नहीं पाओगे ये तय है। चीन ने अपने यहाँ ऐसे हुनरमंद व्यक्तियों की फ़ौज खड़ी कर दी। जनसंख्या में तो हम उनका रिकॉर्ड बस कुछ ही सालों में तोड़ देंगे मगर क्या हम उनके जैसे हुनरमंद देश के रूप में बदल पाएंगे??

हम भी बन सकते हैं उनसे सीखकर। ज्ञान हर तरफ है बस उसको बटोरने की ज़रूरत है। हालांकि हमारा छत्तीस का आंकड़ा है चीन से मगर जो बातें अच्छी हैं वो तो सीखी ही जा सकती हैं। रावण से भी हमें काफी कुछ सीखने को मिल चुका है आखिर।

सादर नमस्कार।

 

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