हर कोई इज़्ज़त करेगा

6 काम करो, हर कोई इज़्ज़त करेगा – मेरा नाम सौरभ है और आज मैं आपके लिए लेकर आया हूँ 6 ऐसी महत्वपूर्ण बातें जिन्हें अपनाकर और प्रैक्टिस करके आप समाज में अपनी इज़्ज़त बढ़ा सकते हैं।

हममे से हर शख्स ये चाहता है कि दुनिया उसकी इज़्ज़त करे, उसके विचारों की, उसके कार्यों की, उसके निर्णयों की, उसकी काया की और उसके अहम् की। मगर क्या सच में ऐसा होता है ?

कतई नहीं।

दुनिया में रह रहा हर इंसान आपकी खिल्ली उड़ाने के लिए तैयार बैठा है और उसके ऐसा करने के मौके और अधिकार खुद आप ही तो देते हैं। यकीन नहीं होता ना ? ऐसा ही है, ये हम ही हैं जो ये तय करते हैं कि सामने वाला हमें इज़्ज़त नवाज़ेगा या इज़्ज़त उतार देगा।

चलिए ज़रा पता करते हैं कि ऐसे क्या कारण है जिनकी वजह से हम हीन भावना से ग्रसित हो जाते हैं और दुनिया हमारा मज़ाक उड़ाने लगती है मगर हम चाहे तो ऐसा होने से रोल सकते हैं।

आज हम बात करेंगे Nathaniel Branden द्वारा लिखी गई एक कालजई पुस्तक The Six Pillars of Self Esteem से ली गई 6 बातों का जिन्हे लागू करके हम खुद का आत्मविश्वास तो बढ़ा ही सकते हैं और दुनिया हमारी इज़्ज़त करने पर मजबूर भी हो जाती है।

6 काम करो, हर कोई इज़्ज़त करेगा

 

1 – The practice of living consciously :-

कुछ लोग सिर्फ ज़िन्दगी काटने के लिए पैदा हुए हैं। उन्हें अपना काम पसंद नहीं है फिर भी सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक नौकरी बजा रहे हैं। अगर आप उनके दिनचर्या पर नज़र डालेंगे तो पाएंगे लगभग सबकी एक ही तरह की होती है।

सुबह देरी से उठना, अनिच्छा से अपने ऑफिस जाना, बेतरतीब तरीके से काम निपटना, साथी कर्मचारियों के साथ हमेशा नेगेटिव बातें करना और उन्हें भी डिमोटिवेट करना, शाम को थका हुआ मुँह लेकर घर पहुंचना, जाते ही टीवी पर लग जाना, बीवी और बच्चों से खीजना फिर बात बात पर झगड़ पड़ना।

वहीँ एक इंसान जो सुबह जल्दी उठता है, शारीरिक मेहनत करता है, ध्यान लगाता है, अच्छा नाश्ता करता है, समय पर ऑफिस पहुँचता है, लोगों के बीच हमेशा हल्का फुल्का माहौल बनाये रखता है, शाम को समय पर काम निपटता है, समय पर घर पहुँचता है, अपने बच्चों के साथ खेलता है, अपने परिवार के साथ खाना खाता है।

सही मायने में अपनी ज़िंदगी को जी रहा है। तो आपके ख्याल से कौन सी ज़िंदगी खुशगवार है ? जाहिर है दूसरी वाली। क्योंकि यहाँ हमें खुद के साथ साथ समाज को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी दिखती है। ऐसे इंसान हमेशा अपने विचारों की इज़्ज़त करते हैं और समाज में अपनी खुली सोच के कारण इज़्ज़त पाते हैं।

आज के वक्त में आपने भी नोटिस किया होगा कि लोग सामाजिक मुद्दों पर बात करने से बचते हैं, उन्हें लगता है ऐसा करके वे सबके प्रिय बने रहेंगे लेकिन होता इसका उल्टा है। जब समाज ख़राब हो रहा हो तो सबकी जिम्मेदारी बनती है उसे सही रास्ते पर लाने की। ऐसा ना करके लोग खुद के होने पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर देते हैं। ऐसे लोगों की कोई इज़्ज़त नहीं करता।
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2 – The practice of self acceptance : –

आपने अक्सर लोगों की खुद को गोरा करने की जद्दोजहद में लगा हुआ पाया होगा। ऐसे लोगों की मानसिकता को समझने की ज़रूरत है। ऐसा नहीं है कि वे सिर्फ गोरे होने के लिए ऐसा कर रहे हैं बल्कि सच्चाई ये है कि वे खुद को पसंद नहीं करते।

इस दुनिया में आप जैसे आये हैं, जैसी काया आपने पाई है उसे कुबूल कीजिये। जो लोग खुद को दूसरों से तुलना करते हैं और खूबसूरती के झूठे मायनों में बांधने की कोशिश करते हैं वे कभी ना तो खुश रहते हैं और ना ही कभी दूसरों से इज़्ज़त पाते हैं। यह एक थंब रूल की तरह है, पहले खुद की इज़्ज़त करना सीखिए तभी दूसरे आपकी इज़्ज़त करेंगे।

हमारी ज़िंदगी में 2 तरह की मुश्किलें आती हैं, एक जिन्हें हम कोशिश करके हल कर सकते हैं और एक वे जिन्हें हल नहीं किया जा सकता। दूसरी तरह की मुश्किलों को कुबूल करना होता है। जिस दिन हम कुबूल करना सीख जाते हैं उसी दिन से सुधार की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। जब तक आप किसी परेशानी को परेशानी मानेंगे ही नहीं तब तक उसे सुधारा नहीं जा सकता।

मेरे बाल 12 साल की उम्र में ही सफ़ेद हो गए थे, लोगों ने खूब मज़ाक बनाया लेकिन मेरा नजरिया अलग था। मेरे हिसाब से पश्चिमी देशों में तो बचपन से ही सफ़ेद बाल होते हैं तो क्या वे बेहूदे दिखते हैं ?

हालाँकि मैंने आयुर्वेद का सहारा लिया और आज पहले के मुकाबले सफ़ेद बालों का प्रतिशत लगभग ना के बराबर हो चुका है। मैंने इस बात को कभी इतना महसूस नहीं किया कि मेरे बाल समय से पहले ही सफ़ेद क्यों हो गए। क्योंकि मैं खुद से ज़्यादा इस दुनिया में किसी से प्यार नहीं करता।

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3 – The practice of self responsibility : –

अपनी ज़िंदगी के हर एक घोड़े की कमान आपके हाथों में है। आप जैसे चाहेंगे और जहाँ चाहेंगे उस घोड़े को ले जाया जा सकता है। यदि आपकी लाइफ में कुछ गलत हो रहा है तो वो आपके भूतकाल में किये गए कार्यों का परिणाम है।

यदि आप अपने भविष्य को बेहतर देखना चाहते हैं तो अभी से अपने कर्मों की जिम्मेदारी लेनी होगी। अपने हर एक एक्शन को भलीभाँति समझकर जो व्यक्ति उसकी जिम्मेदारी भी लेता है वो ही समाज में इज़्ज़त पाता है। आपको अपने सामाजिक, शारीरिक, आर्थिक और आध्यात्मिक जीवन की जिम्मेदारी खुद लेनी पड़ेगी। आप आज जो कुछ भी हो उसके पीछे सिर्फ आपका हाथ है।

हमारे आस पास या हमारे घर में ही कई लोग मिल जायेंगे जो दिन भर उल्टा सीधा खाते हैं और एक्सरसाइज भी नहीं करते। जब उनकी तोंद बाहर निकल आती है तो फिर वो विक्टिम कार्ड खेलते हैं। किसी बीमारी का बहाना बना कर अपने बढ़ते हुए वजन को जस्टिफाई करने की कोशिश करते रहते हैं।

जबकि उन्हें अपने आलसीपन की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और ये कुबूल करना चाहिए कि इस बढ़ते हुए वजन के पीछे उनका निठल्लापन है। जिस दिन वे इस बात को कुबूल कर लेंगे उसी दिन से उसमे सुधार शुरू हो जायेगा। ऐसे लोगों को लगता है कि विक्टिम कार्ड खेलकर वे लोगों की नज़र में अच्छे बने रहेंगे तो ऐसा बिलकुल नहीं है। लोग जानते हैं कि तुम निठल्ले हो, वो तुम्हारे बहानो की कोई परवाह नहीं करते।

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4 – The practice of self assertiveness : –

अगर आपके बच्चे घर से कहीं दूर जा रहे हैं तो उन्हें ये बात ज़रुर सीखनी चाहिए कि मुश्किल से मुश्किल हालातों में भी उन्हें अपने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं करना चाहिए। कुछ लोग ये बहाना देते हैं कि गलत संगत की वजह से उन्हें शराब की लत लग गई अन्यथा वे उसे हाथ भी नहीं लगते।

ऐसे लोगों को मेरा बस एक ही जवाब है कि भाई तुम्हारे खुद के कोई सिद्धांत ही नहीं हैं। जिस व्यक्ति के अपनी ज़िंदगी को लेकर कुछ सिद्धांत नहीं होते वो कभी समाज में इज़्ज़त नहीं पाता। हमारी अपनी लाइफ कुछ उसूल ज़रूर होने चाहिए जिनके साथ समझौता करना आपके लिए नामुमकिन हो। ना का मतलब सिर्फ ना होना चाहिये।

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5 – The practice of living purposefully : –

एक नदी जब हिमालय से निकलती है तो उसका भी एक मकसद होता है और वो है समंदर में मिलना। इसीलिए वो निरंतर उस दिशा में ही बहती रहती है जिधर उसकी मंजिल होती है। अब मान लीजिये यदि नदी की कोई मंजिल ना होती तो क्या होता ??

वो इधर उधर बहती और बाढ़ लाती जिससे प्रलय आ सकती है। ठीक इसी तरह जिस व्यक्ति का कोई मकसद नहीं होता और बिना मकसद के जिए जाता है वो कभी समाज में इज़्ज़त नहीं पाता। एक बिजनेस मैन जो दिनरात मेहनत करता है ताकि उसका बिजनेस उचाईयों पर पहुंच सके, वहीँ एक कर्मचारी सुबह 10 से 5 सिर्फ इसलिए काम करता है ताकि 1 तारीख को उसकी तनख्वाह आ जाये तो आपको क्या लगता है किसका मकसद बड़ा है ? और किसे ज़्यादा इज़्ज़त की नज़र से देखा जायेगा ? जाहिर तौर पर बिजनेस मैन को।

मेरा भी एक मकसद है। मैं दुनिया में रियल एजुकेशन फैलाना चाहता हूँ वो भी हिंदी भाषा में क्योंकि हमारे यहाँ बहुत कम लोग अंग्रेजी भाषा को समझते हैं जबकि दुनिया भर के आविष्कार अंग्रेजी बोलने वालों ने ही किये हैं। जहाँ एक अथाह ज्ञान फैला हुआ है मगर सिर्फ भाषा के कारण हमारा समाज उससे दूर है।

इस ज्ञान को ना पाने की वजह से ही हमारे यहाँ अधिकतर लोगों की सोच लिमिटेड है, वे अपनी सोच का दायरा बढ़ा ही नहीं पा रहे हैं। आज भी हमारे समाज में कई कुरीतियां हैं जिन्हें सिर्फ खुली सोच से ही दूर किया जा सकता है और उसके लिए साहित्य को पढ़ना पड़ेगा। हर कोई इज़्ज़त करेगा

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6 – The practice of personal integrity : –

हमारी लाइफ में हमने बचपन में कई शैतानियां की हैं, जिन्हे जब आज हम सोचने बैठ जाते हैं तो ख़ुशी का एहसास होता है। मगर हो सकता है कोई ऐसा काम हमसे अनजाने में हुआ हो जिससे हमारा आत्मसम्मान हिल गया हो, जो हमारे उसूलों के खिलाफ रहा हो वो हमें अंदर तक तोड़ के रख देता है।

इसलिए कभी ऐसा कोई फैसला ना ले जिससे आगे चलकर आपको पछतावा हो क्योंकि दुनिया को भले पता ना चले मगर हमारी अंतरात्मा जानती है कि हमने गलत किया है। यदि आप इन बातों का ध्यान रखते हैं तो आपका आत्म सम्मान बढ़ता है।

आत्म सम्मान एक वायरस की तरह काम करता है, यदि आप खुद की नज़रों में एक बेहतर इंसान हैं तो दुनिया को आपका सम्मान करने से कोई नहीं रोक सकता।

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हर कोई इज़्ज़त करेगा

 

तो दोस्तों ये रहे 6 रहस्य Nathaniel Branden द्वारा लिखी गई एक कालजई पुस्तक The Six Pillars of Self Esteem से –6 काम करो, हर कोई इज़्ज़त करेगा  जिनको अपनाकर आप भी समाज में सम्मान पा सकते हैं। जुड़े रहिये हमारे साथ नई तरह की दुनिया से रूबरू होते रहने के लिए।

धन्यवाद

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