हार गया CORONA

मेरा नाम सौरभ है और आज मैं लेकर आया हूँ हार गया CORONA  की केस स्टडी।अगर आज के इस फ़र्ज़ी महामारी के समय में कोई उम्मीद की किरण नज़र आ रही है तो वो शर्तियां न्यूज़ीलैंड है। जहाँ दुनिया भर की सरकारें इस वायरस को रोकने के असफल प्रयासों में हैरान परेशान हैं, वहीँ न्यूज़ीलैंड एक उदाहरण बनकर उभरा है कि इस वायरस को कैसे कंट्रोल किया जा सकता है, फिर मिटाया जा सकता है।

आखिर हार गया CORONA,हालांकि, न्यूज़ीलैंड ने 3 फरवरी तक चीन से आने वाली फ्लाइट्स को बैन नहीं किया था, जैसा अमेरिका कर चुका था, फिर भी विज्ञान और सशक्त मेडिकल टीम के साथ इस देश ने ख़ुद को कोरोना मुक्त कर लिया है।

अब सवाल उठ रहा होगा कि आखिर

 

इस देश ने ऐसा किया कैसे ?आखिर कैसे हार गया CORONA:-

 

 हार गया CORONA
तो आखिर हार गया CORONA NewZeland

 

चलिए ज़रा सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं।

इस वायरस के फैलने की रफ़्तार को देखते हुए, उन्होंने पहले से ही इस पर काम करना शुरू कर दिया था और इसके प्रसार पर उनके वैज्ञानिकों और मेडिकल टीम की पैनी नज़र थी।

सबसे पहले उन्होंने 15 मार्च को एक सख्त क़ानून पारित किया सिर्फ इस महामारी को रोकने तक के वक़्त के लिए जिसमे, बाहर से आये हुए हर एक व्यक्ति को Quarantine करना अनिवार्य कर दिया, जिसे आज के समय में बहुत ही सख्त कानून कहा जा सकता है।

जबकि तबतक पूरे देश में सिर्फ 6 एक्टिव केस थे। उसके ठीक 10 दिन बाद उन्होंने पूरे देश में तालाबंदी करदी जिसमे किसी भी तरह की कोई छूट नहीं दी, सिर्फ़ राशन, पेट्रोलियम, हास्पिटल और मेडिकल स्टाफ को छोड़कर। गाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगा दी, पड़ोस के लोगों से बातचीत का दायरा भी सीमित कर दिया।

यहाँ पर सरकार ने अपने नागरिकों को 10 दिन की मोहलत पहले से ही दे दी थी ताकि जिसे जहाँ पहुंचना है वो पहुंच जाए और ज़रूरी सामनों को इकठ्ठा कर ले ताकि lockdown के समय उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। उनकी तनख्वाह का 75% सीधा लोगों के अकाउंट में डाला गया जिससे उन्हें पैसों की कमी का सामना भी नहीं करना पड़ा।

14 मार्च की सुबह यानि की कानून लागू करने से एक दिन पहले वहां की प्रधानमंत्री Jacinda Ardern ने देश के नाम एक सम्बोधन दिया जिसका नारा था – “We must fight by going hard and going early” और इसी सम्बोधन से आगे बढ़ते हुए उन्होंने ख़ुद की नेतृत्व क्षमता और कुशल मैनेजमेंट को साबित कर दिया।

 

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कानून लागू करने के बाद करीब 100000 लोग उस देश में फंस गए, इस वजह से घबराहट और अफरातफरी का माहौल होना लाज़िमी था। मगर हर दिन Jacinda Ardern जिन्हें न्यूज़ीलैंड में लोग प्यार से Jaz कहते हैं ने देश के सामने हालात की रिपोर्ट रखी जिससे लोगों में विश्वास बना रहा। वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए सुझाव, मेडिकल स्टाफ द्वारा किया गया सराहनीय कार्य, उस समय पर कुल संक्रमितों की संख्या जैसी जानकारी वो लगातार देश को देती रहीं।

इससे पारदर्शिता बनी रही और लोगों का विश्वास भी। इसी दृढ़ इच्छा शक्ति के दम पर वो आगे बढ़ती रहीं। पहले lockdown करके नए संक्रमितों की संख्या बढ़ने से रोक दी फिर जो संक्रमित थे उनका इलाज़ शुरू कर दिया इससे फर्क ये पड़ा कि संक्रमितों की संख्या का ग्राफ लगातार नीचे आता गया, इस परिणाम ने वहां की जनता और मेडिकल स्टाफ में जान फूंक दी और उन्हें विश्वास हो गया कि वो ये जंग जीत सकते हैं।

तभी Jacinda Ardern ने एक नया नारा दिया, “We have the opportunity to do something no other country has achieved: elimination of the virus” जो वहां के लोगों की नसों में लहू बनकर दौड़ गया।

 
बाहरी लोगों की नज़र से देखा जाये तो उनके लिए ये 4 सप्ताह गुज़ारना काफी लम्बा समय रहा मगर इस कदम से वो खुद भी बचे और ये खूबसूरत देश भी बचा रहा, इसलिए उनके चेहरों पर कोई सिकन तक ना आई। न्यूज़ीलैंड के वासी अपनी सरकार पर पूरा भरोसा करते हैं और सरकार उस भरोसे पर खरी भी उतरी।

उनका ये प्लान काम कर गया। जहाँ मार्च के महीने में एक दिन में संक्रमितों का आंकड़ा 146 तक पहुंच गया था वही अप्रैल के मध्य आते आते एक आध केस में बदल गया। न्यूज़ीलैंड ने 26 अप्रैल को 1476 कुल संक्रमित और 19 मौतों का आधिकारिक डाटा पेश किया।

26 अप्रैल को ही देश में एक भी संक्रमित रिपोर्ट नहीं हुआ जो पिछले 6 हफ़्तों में पहली बार हुआ हालांकि 30 अप्रैल तक आते आते सिर्फ 7 नए केस मिले। इन छिटपुट लोगों की संख्या ने सरकार को मजबूती दी और उसने घोषित कर दिया कि वायरस का अंत हो चुका है मगर इसका मतलब ये नहीं है कि एक भी एक्टिव केस नहीं हैं। वायरस का अंत तबतक पूर्ण रूप से नहीं माना जा सकता जबतक इसकी वैक्सीन न बन जाए।

 

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कोरोना के बाद की ज़िन्दगी ?

 
यद्यपि, न्यूज़ीलैंड दावा कर रहा है कि उसने वायरस को हरा दिया मगर ये सफलता की कोई गारंटी नहीं है, क्योंकि सिंगापुर, चीन जैसे देश भी इस वायरस पर काबू पा चुके थे मगर दूसरी लहर ने दावों की पोल खोल दी। और वो दोबारा से इससे निपटने में लगे हुए हैं।

चाहे जो भी हो, अभी तो न्यूज़ीलैंड वायरस से मुक्त हो गया है मगर आगे की डगर ज़रा मुश्किल है क्योंकि उसे बाहर से आने वाले लोगों से तो रोज़ दो चार होना ही पड़ेगा क्योंकि न्यूज़ीलैंड की जीडीपी का 10% हिस्सा Tourism से आता है और उनकी 15% जनता की रोज़ी रोटी इसी पर निर्भर है।

उनका विदेशी मुद्रा भण्डार पूरी तरह से इस इंडस्ट्री पर ही निर्भर करता है। ऐसे में बाहरी व्यक्तिओं के आने से वायरस के दोबारा लौट आने का खतरा अभी भी बना हुआ है और वो इससे कैसे निपटेगा ये भी चुनौती रहेगी।

एक सर्वे की मुताबिक वहां की 50 लाख की आबादी के 87% लोग अपनी सरकार द्वारा किये गए प्रयासों से संतुष्ट दिखे और एक विडिओ में तो एक इंसान ऐसा कहते पाया गया, “We think the government has managed the crisis very well, and we feel fortunate to live in New Zealand”

आशा करता हूँ कि इस आखिर हार गया CORONA केस स्टडी से आपको काफी कुछ सीखने को मिला होगा और ऐसा कुछ भी नहीं है जो कोई और देश नहीं कर सकता बस दृढ़ इच्छा शक्ति और बेहतर प्लान की ज़रूरत थी, जिसे लागू करने की महारत होनी चाहिए।

काफी लोगों के मन में ये सवाल आया होगा कि वो सिर्फ 50 लाख हैं और हम सवा करोड़ तो ऐसा कर पाना कैसे मुमकिन है तो उनको बस मैं एक ही बात कहूंगा कि हवा और पानी के जहाजों से ये वायरस आया है अपने देश में, वो भी कुछ लोगों के माध्यम से,अगर समय रहते कार्य कर लिया होता तो ऐसा वक़्त हमें ना देखना पड़ता। फ़िलहाल, भारत रोज़ाना 10000 नए संक्रमित रिपोर्ट कर रहा है।

 

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सादर नमस्कार

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