CycloneNisarga

Amfaan के बाद Nisarga, ये हो क्या रहा है ?

प्रकृति का कहर लगातार जारी है और अब रुकने वाला नहीं। अभी एक पखवारा भी नहीं बीता सुपर Cyclone अम्फान को कि अब अरब सागर में एक नया तूफ़ान उठ रहा है जिसका नाम है Cyclone Nisarga इसे केटेगरी 2 का तूफ़ान बताया जा रहा है मौसम वैज्ञानिकों के द्वारा। चलिए जानते है Cyclone Nisarga in hindi में  .

Cyclone Nisarga in Hindi
Source:-https://twitter.com/timesofindia/status/1267766480835313665/photo/1

Cyclone Nisarga Update :-

अम्फान भारत के पूर्वी तट पर हिन्द महासागर में उठा तूफ़ान था जिसमे चलने वाली हवाओं की रफ़्तार 180 किलोमीटर प्रति घंटा थी, उसकी तुलना में Nisarga वैसे तो कुछ भी नहीं हैं मगर चिंता की बात ये हैं कि पिछले 100 सालों से अरब सागर से इतना बड़ा तूफ़ान नहीं उठा है, बंगाल की खाड़ी में पिछले 15 सालों में लगातार तूफ़ान आना तो अब आम बात हो गई है मगर अरब सागर में भी अब शुरुआत हो चुकी है। आइये कुछ तथ्यों पर बात करते हैं कि Cyclone Nisarga का कैसा असर पड़ेगा मानव पर:

Cyclone Nisarga 2020 :-

ये तूफ़ान अरब सागर से उठकर महाराष्ट्र और गुजरात के तट से बुधवार को टकराएगा। महाराष्ट्र का उत्तरी भाग व गुजरात का दक्षिणी हिस्सा इससे प्रभावित होने की पूरी सम्भावना है जिसके मद्देनज़र सरकारों ने इसकी तयारी कर ली है तथा राहत बचाव की कई टीमों को भेज दिया गया है।

Cyclone Nisarga in hindi तूफ़ान में 95-100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की सम्भावना है। हवाओं की रफ़्तार ही किसी तूफ़ान की भयावहता को मापने का मानक होती है, जैसे अम्फान को केटेगरी 5 में रखा गया था मगर उड़ीसा के तट से टकराने के बाद बांग्लादेश पहुँचते पहुँचते उसकी हवाओं की रफ़्तार में कमी आती गई और फिर उसे केटेगरी 4 में परिवर्तित कर दिया गया।

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Cyclone Nisarga Details :-

Cyclone Nisagra
Source:-https://twitter.com/Sharwari_A/status/1267751809826861056/photo/1

महाराष्ट्र में मुंबई तो इससे सीधे तौर पर प्रभावित होने वाला है साथ ही अगल बगल के तटीय जिले जिनमे ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग के आंशिक तौर पर प्रभावित होने के भी आसार हैं। जहाँ भारी या कहें बहुत भारी वर्षा होने की पूरी सम्भावना है जोकि अगले दिन भी जारी रह सकती है।

अरब सागर से उठने वाला मानसून वैसे भी केरल के तट पर दस्तक दे चुका है जोकि Cyclone Nisarga in hindi तूफ़ान के साथ मिलकर भारी तबाही मचा सकता है जो पश्चिमी तट पर कन्याकुमारी ये लेकर गुजरात तक के हिस्से को अपनी ज़द में ले लेगा।
हालांकि मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अभी मानसून के महाराष्ट्र पहुंचने में लगभग 10 दिनों का समय लग सकता है मगर कुछ भी इंसान के हाथों में नहीं है, हम सिर्फ अंदाजा लगा सकते हैं।

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मैं ज़रा फिर से कड़ियों को जोड़ते चलता हूँ, पहले कोरोना, अम्फान, टिड्डियों का हमला और अब Cyclone Nisarga in hindi. अगर आपको लगता है कि इन सबका आपसे में कोई सम्बन्ध नहीं है तो दिमाग पर थोड़ा और ज़्यादा ज़ोर देने की ज़रूरत है।

ये सब एक ही कड़ी के अलग अलग हिस्से हैं, जिसे एक शाब्दिक तौर पर हम जलवायु परिवर्तन कहते हैं। हिन्द महासागर में बड़े बड़े जो तूफ़ान आ रहे हैं उसका सीधा सा एक ही कारण है कि हमारे महासागर गर्म हो रहे हैं, महासागरों का गर्म होना ही एक मात्र कारण होता है ऐसे चक्रवातों के पैदा होने के पीछे।

Nisagra Help line number
Nisagra Help line number

ये तूफ़ान आय क्यों :-

अब इस नज़र से अगर देखा जाये तो अरब सागर भी गर्म होने लगा है, अभी तक ये गर्माहट सिर्फ बंगाल की खाड़ी तक ही सिमित थी मगर अब इसका असर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप की इर्द गिर्द होना शुरू हो चुका है। हमने lockdown के दौरान खुद महसूस किया है कि जीवाश्म ईंधन का अंधाधुंध प्रयोग अगर बंद हो जाये तो परिस्तिथियाँ बदली जा सकती हैं मगर अब बिल्ली के गले में घंटी बांधे कौन?

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एक झूठे विकास की दौड़ में दुनिया के लगभग हर देश ने प्रकृति को प्रदूषित किया है। उनके विकास के एजेंडे में कभी भी साफ़ हवा, साफ नदियां, साफ़ महासागर तो कभी रहे ही नहीं। हर जगह खानापूर्ति के नाम पर एक नपुंसक विभाग बनाकर छोड़ दिया गया जिसे हम पर्यावरण विभाग के नाम से जानते हैं। अव्वल तो वहां किसी भी कर्मचारी चाहे वो किसी भी दर्जे का हो कोई अधिकार नहीं दिए जाते और अगर होते भी हैं तो वो भ्रष्टाचार के दलदल में धसे हुए होते हैं।

क्या शिक्षा मिलती है प्रकृति के इस कहर से  :-

ये समस्या कभी कानून भर बना देने से हल ही नहीं होने वाली, हमें अपनी नस्लों को इसकी शिक्षा देनी होगी ताकि आगे चलकर वो भी वही गलती ना करें जो हमने करी हैं। आज के समय में अगर कहीं कोई गलत हरकत पकड़ी भी जाती है तो उसे बचने के भी कानून हैं, मसलन हमारी सरकारें ही ऐसे धंधे में सबसे आगे हैं। विकास के नाम पर जंगल काटने के प्रस्ताव बनते हैं, मगर नियमतः जितने पेड़ काटे जायेंगे उससे दोगुने पहले ही लगाने पड़ते हैं।

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सरकरी कागज़ों पर उनकी रोपाई भी हो जाती है और गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में नाम भी दर्ज हो जाते हैं कि फलानी सरकार ने 2 करोड़ पेड़ लगा दिए मगर क्या कभी किसी ने पूछा या उन्होंने ने बताया कि उसके 4 महीने बाद उनमे से कितने पेड़ ज़िंदा बचे ??? सब घोटाला है और हमारा समाज अब घोटाले की साँसों पर ही खड़ा है। एक पेड़ को पानी देने के तो लाले हैं, महासागर क्या ख़ाक संभलेगा।

यहाँ समस्या की सिर्फ एक ही जड़ है और वो है अपने थोथे विकास के एजेंडे में प्रकृति की उपेक्षा। Look East की नीति पर चलकर ही हम खुद को बचा पाएंगे, जिसमे प्रकृति को एक अहम् स्थान दिया गया है, जिसमे मनुष्य प्रकृति के साथ चलकर भी विकसित हो सकता है, हमारा पडोसी देश भूटान इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। वहां अर्थव्यवस्था से ऊपर इंसान की खुशियों का लेखा जोखा रखा जाता है, इसीलिए भूटान में रहने वाले लोग इस धरती के सबसे खुश इंसान कहे जाते हैं।

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हमें ये डिमांड करनी होगी अपनी सरकारों से क्योंकि जबतक बच्चा रोता नहीं है, माँ को भी पता नहीं चलता कि उसे भूख़ लगी है। ठीक उसी तरह जबतक हम बिजली, पानी, रोज़गार की ही तरह स्वच्छ पर्यावरण की मांग नहीं करेंगे तब तक किसी के कान पर जूं नहीं रेंगने वाली। अगर आप मेरी इन बातों से सहमत हैं तो इस आर्टिकल को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करिये ताकि सफ़र जारी रहे और कारवां बनता चले।

सादर नमस्कार

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