Cyber crime

Cyber Crime – इन 10 तरीकों से हो रहा बैंक खातों से पैसा चोरी 

 

नमस्कार दोस्तों।

Moneysarth में आपका स्वागत है।

आपको साइबर क्राइम (cyber crime) की दुनिया में होने वाली धोखाधड़ी से बचाने के उद्देश्य से हमने यह लेख लिखा है।

इसमें आपको सबसे अधिक प्रयोग होने वाले उन 10 तरीकों के बारे में बताया जाएगा जिसका प्रयोग करके साइबर अपराधी आपको लूट सकते हैं। 

 

Cyber Crime के 10 तरीके

टेक्नोलॉजी के बेहतर होने के साथ-साथ आज के जमाने के साइबर अपराधी भी एडवांस (advance) हो गए है।

नए नए तरीकों से यह अपराधी टेक्नोलॉजी (technology) का दुरुपयोग कर रहे हैं। 

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में बीते दस सालों में भोली जनता इस तरह की ठगी में अपने दो लाख करोड़ रुपये गवां चुकी है

लेकिन आज का ब्लाॅग पढ़ने के बाद आपके इस तरह की धोखाधड़ी से बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी।

इतना ही नहीं आप इन जालसाज़ों को आसानी से पहचान कर इनसे बच पाएंगे और आपका पैसा सुरक्षित रहेगा।

 

1- ATM card क्लोनिंग –

साइबर अपराध को अंजाम देने वाले लोग एटीएम कार्ड का डेटा (data) चोरी कर लेते हैं। जिसके बाद एटीएम क्लोनिंग की सहायता से आपके कार्ड का डुप्लीकेट कार्ड (duplicate card) बनाते हैं। इस डुप्लीकेट कार्ड का प्रयोग करके बैंक खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं।

इसलिए साइबर सिक्योरिटी (cybersecurity) के विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अपने कार्ड की जानकारी किसी को नहीं बतानी चाहिए। एटीएम का प्रयोग करते समय भी अपना गुप्त पिन (secret pin) छिपाकर ही डालना चाहिए।

ध्यान रहे कोई भी बैंक किसी भी तरह के काम के लिए आपका एटीएम गुप्त पिन नहीं मांगता है। 

 

2- नौकरी Online crime

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नौकरी से संबंधित पोर्टल में कई बार आवेदन जमा करने के लिए पैसे लिए जाते है। इसके अलावा नौकरी से जुड़े अलर्ट पाने और विज्ञापित (advertise) करने के नाम पर फीस जमा कराने को कहा जाता है।

लेकिन बाद में पता चलता है कि पोर्टल फ्राॅड (fraud) है। इससे बचने के लिए आपको पहले उस जाॅब वेबसाइट से जुड़ी समीक्षाओं (reviews) को पढ़ना पड़ेगा।

वेबसाइट की प्रमाणिकता (authenticity) की अच्छे से जांच करने के बाद ही किसी तरह का भुगतान करना चाहिए। 

 

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3- Card की Data चोरी

इस तरह एटीएम कार्ड के डेटा की चोरी को कार्ड स्कैनर (card scanner) की सहायता से अंजाम दिया जाता है। यदि आप किसी दुकान या पेट्रोल पंप में अपने कार्ड के जरिए भुगतान (payment) करते हैं, तो ध्यान रहे कर्मचारी आपकी नज़रों के सामने रहकर ही भुगतान प्रकिया (payment process) को पूरा करे।

अकेले में जालसाज़ डेटा चोरी करने वाला डिवाइस उस मशीन के कार्ड रीडर स्लॉट (card reader slot) में लगा देते हैं। आपको पता भी नहीं चलेगा कि कब उस जालसाज़ ने आपके कार्ड का डेटा चोरी कर लिया, क्योंकि यह काम बहुत ही जल्दी हो जाता है।

फर्जी की बोर्ड से भी इस तरह की डेटा चोरी को किया जाता है। 

 

4- बैंक खाता जांच से जुड़ी नकली कॉल (fake call)

किसी भी तरह के लेनदेन में अस्वीकृति (rejection) पाने पर अपने बैंक को जानकारी दें। परंतु इससे पहले इस बात का ध्यान रखें कि किसी भी कॉल में बैंक की जानकारी और ओटीपी (OTP) को न बताएं।

शायद आप जानते ही होंगे कि ओटीपी (OTP) एक बार प्रयोग होने वाला पासवर्ड होता है। OTP की फुल फॉर्म होती है one time password

समय समय पर आपको अपने बैंक खातों की जांच करते रहना चाहिए। छोटी-छोटी कटौती होने पर हो सकता है कि आपको पता न चले और बाद में बड़ी रकम आपके अकाउंट से चोरी हो जाए। 

 

5- Whatsapp Call के जरिए crime

साधारण कॉल के साथ-साथ अब सोशल मीडिया प्लेटफार्म व्हाट्सएप (whatsapp) का प्रयोग भी साइबर क्राइम की दुनिया में किया जा रहा है। अजीब से या अज्ञात नंबर से कॉल आने पर सावधान होकर बात करें। 

साइबर सिक्योरिटी के विशेषज्ञ यही सलाह देते हैं कि यदि नंबर बहुत ही अलग सा हो यानी भारतीय न लगे, तो उसे न ही उठाएं। इस तरह की कॉल आपको मुसीबत में डाल सकती हैं। 

 

6- Matrimonial Websites crime

मैट्रिमोनियल साइट (matrimonial site) पर अपना अकाउंट बनाते समय ध्यान रहे आपको अपने बैंक से जुड़े नंबर व ई-मेल (number or email) को नहीं भरना है। इसके लिए अलग से बनाए गए ई-मेल अकाउंट का प्रयोग करें।  

गृह मंत्रालय का साइबर सुरक्षा विभाग भी बताता है कि ऑनलाइन मैट्रिमोनियल वेबसाइट (matrimonial site) पर अपनी निजी जानकारी को साझा करने से बचें। इसी के साथ साथ अलग से ईमेल आई बनाकर ही ऐसी साइट पर पंजीकरण करें।  

इस तरह की वेबसाइट में चैट के दौरान बैंक डिटेल्स मांगने का प्रयास किया जाता है। 

 

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7- QR code का Cyber Crime

क्विक रिस्पांस कोड (quick response code) को सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भेजा जा रहा है। इस क्यूआर कोड (QR code) में जिस लिंक को जोड़ा जाता है। उससे अपकी पेमेंट अपने आप ही हो जाती है। बस उस क्यूआर कोड को एक बार स्कैन करने की जरूरत होती है और पिन डालना होता है। 

इसलिए किसी भी अंजान के द्वारा भेजे गए क्विक रिस्पांस कोड को स्कैन (scan) न करें।

इस क्यूआर कोड के नीचे एडिटिंग करके कम राशि दिखाई जाती है। लेकिन इससे बैंक अकाउंट खाली हो जाता है। 

 

8- यूपीआई (UPI) crime

यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (Unified Payment Interface) में अधिकतर लोगों को पता ही होगा। जिनको पता है वह जानते ही होंगे कि इस से पेमेंट कितनी जल्दी हो जाती है। जालसाज़ भी इसी तरह चंद सेंकड में आपका अकाउंट खाली कर देते है।

यूपीआई (UPI) में डेबिट लिंक (debit link) लगा कर साइबर क्राइम से ताल्लुक रखने वाले लोग ठगी जैसे अपराधों को अंजाम देते हैं। इसलिए किसी भी तरह के डेबिट लिंक (debit link) को भूलकर भी क्लिक न करें।

अंजान लोगों द्वारा भेजे गए लिंक को क्लिक ही न करें क्योंकि वर्तमान समय में इस तरह की गई लूट के कई मामले सामने आ रहे हैं।

 

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9- ईमेल स्पूफिंग (email spoofing) crime

ईमेल स्पूफिंग (email spoofing) में ठग मशहूर कंपनियों से मेल खाने वाला ईमेल अकाउंट (email account) बनाते हैं।

नामी कंपनियों के नाम और इन फर्जी वेबसाइट के नाम में काफी अधिक अंतर नहीं होता।

कुछ अल्फाबेट (alphabet) को बदल कर नाम व लोगो (logo) को कुछ इस तरह डिजाइन (design) किया जाता है कि बहुत ध्यान से देखने पर ही आपको पता चल सकता है कि यह वेबसाइट या अकाउंट फर्जी है।

इसके बाद वह आपकी डिटेल्स को इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं। सर्वे फॉर्म (survey form) भरने जैसी तकनीकों को अपना (adopt) कर यह आपसे डेटा लेते जाते हैं और आपको समझ भी नहीं आता।

बिना सोचे समझे और प्रामाणिकता (authenticity) जांच के बगैर ही अपना नंबर और जानकारी भरना आरंभ शुरू कर देते हैं। इससे हमेशा बचें। 

 

10- Dealership and Lotteries का Cyber Crime

नामी कंपनी आईओसी (IOC) ने अपनी वेबसाइट के माध्यम से भी लोगों को डीलरशिप के नाम से होने वाली धोखाधड़ी के बारे में जागरुक किया था। कौन बनेगा करोड़पति के नाम से लाॅटरी का लालच देकर कई लोगों को लूटा गया है। समाचारों में भी इस तरह के मामले सुनने व पढ़ने में आते हैं। 

लाॅटरी से जुड़े फरेब में आपको करोड़पति बनाने का लालच दिया जाता है और टैक्स (tax) के नाम पर पहले राशि जमा कराने को कहा जाता है। टैक्स राशि के भुगतान के बाद ही यह लोग गायब हो जाते हैं। 

किसी भी तरह के ऑनलाइन बैंकिंग (online banking) में हुए फ्रॉड की जानकारी को यदि आप बैंक को तीस दिन के भीतर देते हैं। तो आपको आपका पैसा वापिस मिल जाता है। इसलिए इस तरह की घटना होने पर शीघ्र से शीघ्र बैंक में शिकायत दर्ज कराएं। 

 

अपने पासवर्ड इत्यादि को कहीं लिखने से बचें। इस तरह की जानकारी को याद रखना ही आपके लिए सही है। आज के समय में हो रही ऑनलाइन ठगी Cyber Crime को ध्यान में रखते हुए हमने आपसे यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

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धन्यवाद।

जय हिंद।

 

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