China Power Crisis

China Power Crisis – जानिए चीन क्यों झेल रहा है विद्युत संकट

 

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आज हम आपके साथ China Power Crisis से जुड़ी हर वह जानकारी साझा करेंगे जिससे आपको सभी तथ्यों को समझने में आसानी होगी। 

 

दुनिया के बड़े निर्यातक देशों की गिनती में आने वाला देश चीन आज बिजली के भयंकर संकट से गुजर रहा है। बुद्धिजीवियों की भाषा में इस China Power Crisis कहा जाता है। कई दशकों के बाद चीन को ऐसे गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसका प्रभाव चीन की पूरी सप्लाई चेन पर देखा जा रहा है। 

कोरोना महामारी के बाद विश्व की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी थी जो अब धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी थी लेकिन चीन पर आया यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी नुकसान भारी नुकसान पहुंचा सकता है। 
 

China Power Crisis

 

क्या है China Power Crisis का कारण 

 
चीन की सरकार ने इस संकट का मुख्य कारण कोयले की आसमान छूती कीमतें बताया है। हालांकि विदेश नीति की रिपोर्ट्स की मानें तो इस संकट के लिया चीन सरकार की नीतियां वजह बताई जा रही हैं।

चीनी उद्योगपतिओं व  निर्माताओं ने यह चेतावनी दी है कि यदि सरकार बिजली के उपयोग में कटौती करती है तो इसके परिणामस्वरूप जिआंगसु, झेजियांग और ग्वांगडोंग प्रांतों जैसे आर्थिक बिजलीघरों में उत्पादन काम हो जाएगा।

इस वजह से वस्तुओं की कीमतें आसमान छू लेंगी।  बता दें कि ये तीनों स्थान चीन के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण हैं जो एक साथ देश के उत्पादन के लगभग एक तिहाई हिस्से के लिए उत्तरदायी हैं। 

 

 

Crisis की वजह एक Twitter पोस्ट 

 
जैसा की हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि China Power Crisis का प्रमुख कारण कोयले की कम आपूर्ति है। इस कम आपूर्ति का मुख्य कारण है चीन और ऑस्ट्रेलिया का  एक राजनयिक विवाद। यह विवाद चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा ट्विटर पर शेयर की गयी एक पोस्ट से शुरू हुआ।

इस विवाद को देखते हुए बीजिंग ने ऑस्ट्रेलियाई कोयले के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। इसका प्रभाव  विशेष रूप से चीनी प्रांतों को प्रभावित कर रहा है।

China दुनिया में कोयले का प्रमुख उपभोक्ता है और कुल ऊर्जा खपत का कम से कम 60 प्रतिशत कमोडिटी का उत्पादन करता है। चीन की राजधानी बीजिंग को अब इंडोनेशिया, रूस और दक्षिण अफ्रीका जैसे अन्य आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है 

 

चीन के हालात 

 
चीन का ऊर्जा संकट वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए नवीनतम झटके के रूप में आकार ले रहा है क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े निर्यातक कारखाने उत्पादन पर अंकुश लगाकर ऊर्जा के संरक्षण के लिए मजबूर हैं। चीन में electricity crisis के दुष्परिणाम केवल वस्तु बाजार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि चीन के लाखों लोगों को मजबूरन बिना बिजली के अन्धकार में जीवन यापन करना पड़ रहा है। इसका असर विशेष रूप से चीन के उत्तरी हिस्सों में हुआ है और दक्षिण में भी काफी हद तक बत्ती गुल है। 

 

इन वजहों से नहीं है बिजली 

 

आपको यह जानकर बहुत हैरानी होगी कि चीन के उत्तरी हिस्सों में बिजली न होने का अलग कारण है और दक्षिणी हिस्से की बिजली किसी दूसरी वजह से गायब है।

जी हाँ! उत्तरी चीन में बिजली की कमी कोयले की कम आपूर्ति और आसमान छूती कीमतों की वजह से हुई है। वहीं दूसरी तरफ दक्षिणी चीन में electricity crisis का कारण कम जल विद्युत उत्पादन है। 

बिजली की कमी के परिणामस्वरूप चीन में कई वित्तीय और रेटिंग एजेंसियों ने देश के सकल घरेलू उत्पाद के लिए अनुमानित विकास दर को आठ प्रतिशत से भी  कम कर दिया है।

आपको यह बता दें कि सर्दियों के करीब आने के साथ-साथ ही स्थिति और भी बदतर होने की आशंका के साथ सामने आने वाला परिदृश्य, दुनिया को आश्चर्य में डाल रहा है कि कम्युनिस्ट राष्ट्र के साथ क्या गलत हुआ है।

 

निर्यात कंपनियों का हाल 

 

क्लार्क फेंग, जो एक वीटा लीजर कंपनी के मालिक हैं। उनकी कंपनी चीनी निर्माताओं से विदेशों में बेचने के लिए टेंट और फर्नीचर खरीदती है, ने कहा कि पूर्वी प्रांत झेजियांग में बिजली की कमी है, जहां कंपनी पूर्ण रूप से आधारित है।

क्लार्क फेंग कहा कि प्रांत में कपड़ा निर्माताओं को बिजली की कमी के कारण उत्पादन में रुकावट का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण से व्यवसायों को एक बड़ा झटका मिला है। निर्माताओं ने कीमतों में बढ़ोतरी करना शुरू कर दिया है और नए विदेशी ऑर्डर लेना स्थगित कर दिया है। 

चीन की निर्यात कंपनियां पहले से ही विदेशों में माल भेजने के लिए संघर्ष कर हैं , और अब उत्पादन क्षमता प्रतिबंध के साथ यह ज्यादा मुश्किल होने वाला है। ये कंपनियां पहले से ही कई अनिश्चित कारकों से निपटने की कोशिश कर रही थी, और अब एक और है जो उनकी कमर तोड़ने को उतारू है। 

 

 

निर्माताओं के हालत 

 
आपने निर्यात कंपनियों का हाल तो जान लिया चलिए अब आपको बताते हैं चीन में वस्तुओं का निर्माण करने वाली कंपनियां किस कदर जूझ रही हैं। चीन की स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, बिजली की खपत में कटौती के स्थानीय सरकार के आदेश के जवाब में झेजियांग में सिंथेटिक, कपड़ा, नायलॉन व दूसरी वस्तुओं के निर्माताओं ने सितंबर के आखिर तक अपनी उत्पादन क्षमता को आधा कर दिया। 

 

चीन की कुछ उत्पादन कंपनियां तो बंद होने की कगार पर हैं। उत्पादन की कमी कंपनियों को चीनी व विदेशी उपभोक्ताओं के लिए माल की कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर करेगी।

चीन का यह electricity crisis औद्योगिक उत्पादन की दर को गिरा देगा और आर्थिक विकास को प्रभावित करेगा। यह भारत और अन्य देशों को भी प्रभावित कर सकता है जो औद्योगिक उपकरणों और मशीनरी के आयात के लिए चीन पर निर्भर हैं। 

 

अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

 
Electricity crisis चीन की अर्थव्यवस्था पर ऐसे समय में भार डाल रही है जब यह देश पहले से ही कई आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है। कड़े वायरस नियंत्रण उपायों और संपत्ति बाजार पर लगाम लगाने के लिए कड़े प्रतिबंध जैसे कारणों के कारण उत्पादन पहले से ही धीमा है।

चाइना इंटरनेशनल कैपिटल कारपोरेशन के अनुसार या तो सकल घरेलू उत्पाद के विकास के अनुमानों को घटा देना चाहिए या बिजली व्यवधानों के कारण कम जीडीपी (GDP) में अत्यंत गिरावट की चेतावनी दी है।

इसका सीधा प्रभाव वस्तुओं के उत्पादन पर हो रहा है जिसके  कारण  कपड़ा, खिलौनों से लेकर मशीन के कलपुर्जे तक आपूर्ति की कमी का अहसास वैश्विक बाजारों को जल्द ही होने वाला है। 

 

 

जनता का हाल 

 
चीन के ब्रॉडकास्ट सीसीटीवी के अनुसार पूर्वोत्तर लिओनिंग प्रांत की सरकार ने स्थानीय नियामकों से उत्पादन और आवासीय उपयोग को प्रभावित करने से रोकने के लिए स्थानीय लोगों से आग्रह किया है की वे जितना हो सके बिजली बचाएं।

जिआंगसु जैसे प्रांतों में स्ट्रीट लाइट भी बंद कर दी गई है। वहीं कुछ उत्तरी प्रांतों में तो ट्रैफिक लाइट भी बंद कर दी गई है। इतना ही नहीं चीन के ज्यादातर अपार्टमेंट और दूसरी बिल्डिंगों में लिफ्टों का संचालन भी बंद कर दिया गया है, जिससे लोगों को सीढ़ियों का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

कुछ जगहों पर एयर कंडीशनर (AC) के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी गयी है। लगभग नौ प्रांतों में, बिजली सीमित मात्रा में सप्लाई की जा रही है, जबकि औद्योगिक उपयोगकर्ताओं को चरम खपत के घंटों के दौरान उत्पादन बंद करने के लिए कहा गया है। 

 

क्यों नहीं बढ़ रहा उत्पादन?

 

चीन की बिजली बनाने वाली कम्पनियां अपना उत्पादन बढ़ने को राजी नहीं हैं।  इसका मुख्य कारण है चीन सरकार का बिजली की कीमतें बढ़ाने में असमर्थ होना।

जी हां चीन को इस समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वे कम्युनिस्ट शासन द्वारा नियंत्रित होते हैं। चूंकि इन बिजली उत्पादकों को कोयले की कीमतों में वृद्धि को देखते हुए अत्यधिक घाटा होने  का खतरा है, इसलिए वे मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने के लिए अनिच्छुक हैं। 

 

 

ऐसे हो सकता है समाधान 

 

इस समस्या से निपटने के लिए सबसे पहले चीन को ऑस्ट्रेलिया से कोयले के आयात की समीक्षा करनी चाहिए। इसे चीन को कम कीमत पर कोयला प्राप्त करने में मदद मिलेगी जैसे भारत को ऑस्ट्रेलिया से अधिक प्रतिस्पर्धी मूल्य पर कोयला मिलता है।

हालाँकि चीन आम जनता के लिए बिजली का शुल्क नहीं बढ़ा सकता तो कम से कम औद्योगिक इकाइयों के लिए बिजली शुल्क बढ़ाया जा सकता है।  

 

चीन के न्यूज़ चैनल्स की माने तो चीनी अधिकारी बिजली उत्पादकों को दरें बढ़ाने की अनुमति देने की योजना बना रहे हैं। लेकिन इसपर सवाल यह उठता है कि चीनी नागरिक इस बढ़ने वाली कीमत को कहां तक वहन करेंगे, यह एक बड़ा सवाल है। 

उत्सर्जन मानदंडों को पूरा करने के लिए उत्पादन प्रतिबंधों से ऊर्जा की जरूरतों को कम करने की उम्मीद की जा सकती है इससे औद्योगिक इकाइयों को अपना टारगेट पूरा करने में मदद मिल सकती है।

यदि चीन कोयले से विद्युत् उत्पादन करने में असमर्थ है तो उसे हीड्रोपॉवर से बिजली उत्पन करने पर ज़ोर देना चाहिए। 

 

तो यह थी China Power Crisis से जुडी जानकारी। 

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