Banking in india

मेरा नाम सौरभ है और आज मैं लेकर आया हूँ ऐसी केस स्टडी बैंकिंग सिस्टम इन इंडिया जिसे पढ़कर आपके तोते उड़ जायेंगे।

 

बैंकिंग सिस्टम इन इंडिया या भ्र्ष्टाचार का केंद्र

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि दुनिया के बाकि सभी देशों की तरह हमारे देश में भी एक बैंकिंग सिस्टम है। जिसे अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है। जहाँ हम अपनी गाढ़ी कमाई जमा करते हैं ताकि वो सुरक्षित रहे और साथ ही उसमे बढ़ोतरी भी होती रहे। बचपन से लेकर आजतक हम बैंक को लेकर हमेशा ईमानदार रहे हैं और हमें सिखाया भी यही गया है कि बैंक से बेहतर विकल्प हो ही नहीं सकता हमारी कमाई को सुरक्षित रखने के लिए।

तो ये रही आम अवधारणा जो 99% लोग मानते हैं। 1% लोग ऐसा नहीं मानते और ये वही 1% लोग हैं जो विश्व की 95% दौलत को कण्ट्रोल करते हैं। और ये लोग 95% दौलत को इसलिए कण्ट्रोल करते हैं क्योंकि वो इस तथाकथित बैंकिंग सिस्टम को भलीभांति जानते हैं और वो भी इसीलिए क्योंकि उन्होंने ही इस सिस्टम को बनाया है।

चलिए कुछ अलग तरह के तथ्यों के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं, जिसे सरकारें हमें कभी नहीं बताने वाली।

Banking System in India
Banking System in India

 

बैंकिंग की अवधारणा :-

औद्योगिक युग की शुरुआत के बाद जब उद्योगों ने रफ़्तार पकड़ी तो बिजनेस को बढ़ाने के लिए और पैसों की ज़रूरत पड़नी शुरू हो गई। अब इस कमी को पूरी करने के लिए उद्योगपति जितना पैसा जुटा सकते थे वो नहीं कर पा रहे थे, वजह सिर्फ एक कि पैसा कहीं एक जगह पर केंद्रित नहीं था।

वो लोगों की जेबों में, घर की अलमारी में, बर्तनो में या फिर ज़मीन में गड़ा हुआ था। इस जटिल समस्या को उद्योगपतियों ने चुनौती के रूप में लिया। वो 1% लोग पैसे के बहाव को समझते थे और हैं इसलिए उन्होंने सरकारों के साथ मिलकर आधुनिक बैंकिंग सिस्टम की नीव रखी जिसे आम आदमी के लिए दूसरी तरह से पेश किया गया जबकि सच्चाई आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

 

बैंकिंग सिस्टम इन इंडिया को लागू करने का सबसे बड़ा चैलेंज :-

“आवश्यकता ही विकास की जननी है” इस मुहावरे को यहाँ पर सार्थक किया गया। लोगों को ये बताया गया कि बैंक में उनका पैसा सुरक्षित है, उसे कोई चुरा नहीं सकता और साथ ही उन जमा पैसों के बदले उन्हें ब्याज के रूप में कुछ और पैसे भी मिलेंगे। तात्कालिक समय में जब लोगों के पास कुछ पैसा इकठ्ठा हो जाता था तो उनके लिए सबसे बड़ी समस्या उसको सुरक्षित रखना था।

चोरी, डकैती की घटनाएं आम हुआ करती थी क्योकि पुलिस तंत्र इतना मजबूत नहीं हुआ था। इन सब परिस्थितियों की देखते हुए लोगों के लिए बैंक में पैसा जमा करना एक अच्छा विकल्प बनकर उभरा। लोगों को ये भी आस्वस्त किया गया कि बैंक में कुछ अनहोनी हो जाने पर भी उनकी रकम सुरक्षित रहेगी क्योंकि सरकार उसकी गारंटी देती है। इन सब सुविधाओं को देखते हुए लोगों के धड़ल्ले से अपने पैसे जमा करने शुरू कर दिए और बैंकिंग सिस्टम चल निकला।

बैंक पैसा कैसे कमाते हैं ?

यहाँ से शुरू होता है भ्र्ष्टाचार का खेल, बैंक जो भी पैसा अपने खाताधारकों से जमा करते हैं उसे लोन के रूप में लोगों को देते हैं, जहाँ से उन्हें ब्याज मिलता है। उसी ब्याज में से हमें हमारे हिस्से का ब्याज हमें तय समय पर देते रहते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें गलत क्या है?

तो जनाब गलत तो अब मैं आपको बताने जा रहा हूँ। हर एक बैंक को एक अधिकार होता है कि उस बैंक में जितनी भी रकम खाताधारकों की जमा है, उसकी 10 गुना रकम वो लोन के रूप में बाँट सकते हैं। ये 9 गुना अतिरिक्त पैसा सिर्फ कागज़ों पर होता है यानी कि आभासी, वास्तविकता ये है कि उतना पैसा उस बैंक में होता ही नहीं है। क्योंकि वो लोन अकाउंट उस बैंक में ही होता है तो वो बैंक इस आभासी पैसे को आसानी से कण्ट्रोल कर सकता है।

 

अमीर और अमीर कैसे हुए?

अब इस 10 गुना रकम वाले नियम का फायदा उठाकर उद्योगपतियों ने बैंको से लोन लिया और वो भी वास्तविक रकम का 10 गुना। अब मान लीजिये आपके पास 1 लाख रूपए हों और कोई उद्योगपति उसे उधार लेना चाहे तो उसे अधिकतम 1 लाख रूपए ही आपसे मिल पाएंगे।

मगर इस बैंकिंग सिस्टम का फायदा उठाकर वो आप ही के पैसे को 10 गुना करके इस्तेमाल करता है और उन पैसों से और पैसा बनाता है। आपको सिर्फ 3% ब्याज ही मिलता है जबकि वो उद्योगपति उन पैसों का इस्तेमाल करके दुनिया की दौलत का बहाव अपनी तरफ कर लेता है।

 

वर्तमान की आर्थिक स्थिति के लिए बैंकिंग सिस्टम की जिम्मेदारी:-

वर्तमान समय में जो अर्थव्यवस्था ढहने पर है उसकी पूरी जिम्मेदारी इस बैंकिंग सिस्टम की है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था ढहने वाली है उसकी वजह है वहां की कंपनियों पर जो बैंकों का कर्ज है वो अमेरिका की कुल अर्थव्यवस्था से 20% ज़्यादा हो चुका है।

इस असीमित कर्ज के बढ़ जाने की सीधी सी वजह ये बैंकिंग सिस्टम इन इंडिया ही है। लोगों ने अपना ज़्यादा से ज़्यादा पैसा बैंकों में रखा जिससे बैंकों को लोन देने की ज़्यादा से ज़्यादा रकम मुहैया हुई और उन्होंने बेधड़क लोन बाटे। अब हालात ये है कि कंपनियां लोन चुकाने की स्थिति में नहीं हैं, उनके दिवालिया होते ही अमेरिका के बैंक दिवालिया हो जायेंगे और अमेरिका की अर्थव्यवस्था ख़त्म हो जाएगी।

फिलहाल अमेरिका इस स्थिति को सिर्फ टाल रहा है, नए नोट छापकर। डॉलर को devalue करके कुछ समय तक तो इसे टाला जा सकेगा मगर अर्थव्यवस्था का ढहना तय है।

क्या बैंकिंग सिस्टम महंगाई के लिए भी जिम्मेदार है?

जी हाँ, बुनियादी तौर पर हमारा बैंकिंग सिस्टम महंगाई के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। आपने अक्सर सुना होगा कि देश ने वर्ल्ड बैंक से लोन लिया है। 1 लाख करोड़, ये आभासी सी लगने वाली रकम असल में आभासी ही होती है जो एक चेक जिसे IOU के नाम से जाना जाता है के माध्यम से हमारे बैंकिंग सिस्टम में आती है।

इस रकम को सिर्फ एक कागज़ पर लिखकर हमें दे दिया जाता है और हमारा बैंकिंग सिस्टम अपने फ़र्ज़ी नियमो के माध्यम से उस रकम को अर्थव्यवस्था में डाल देता है। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया बाकी के बैंकों को ये पैसा लोन के रूप में देता है, और हमारा बैंकिंग सिस्टम उस 1 लाख करोड़ को तुरंत 10 लाख करोड़ बना देता है फिर लोगों को वो भी लोन बांटता है यानि कि वो पैसा जैसे जैसे बैंकिंग सिस्टम में आगे बढ़ता जाता है, 10 गुना होता जाता है।

अपने नीचे दिए गए आर्टिकल में मैंने आपको इस पैसे के बढ़ने से होने वाली महंगाई के बारे में विस्तार से बताया था।

 

 महंगाई की समस्या और समाधान

 

तो जैसा कि आपने पढ़ा कि बैंकिंग सिस्टम इन इंडिया पूरी तरह से उन 1% लोगों के लिए बनाया गया है जो दुनिया की  95% दौलत पर कण्ट्रोल करते हैं, ना कि आपके लिए। आशा करता हूँ आपको इस जानकारी से काफी कुछ नये अनुभव हुए होंगे। अपनी प्रतिक्रिया हमें कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं।

सादर नमस्कार!

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