आयुर्वेद का महत्व

स्वस्थ रहने के लिए आयुर्वेद का महत्व – कोरोना महामारी के समय में कैसे आप आयुर्वेद के माध्यम से अपने आप को स्वस्थ रख सकते है ?

 

स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद का महत्व

 

Covid 19 एक विश्वव्यापी महामारी है जिसके साथ जीना समय इस समय की मांग है, तो ऐसी परिस्थिति में हम अपने आप को कैसे बचाके रख सकते है ? यह जानना बहुत आवश्यक है जैसा की आप सभी जानते है आयुष मंत्रालय भारत सरकार की तरफ से योग और आयुर्वेद को अपने दैनिक जीवन में अपनानें की सलाह दी जा रही है तो आइये जानते है आयुर्वेद की मदद से हम अपने स्वस्थ्य की किस प्रकार रक्षा कर सकते है।

 

आयुर्वेद क्या है ?

 

आयुर्वेद को पंचम वेद माना जाता है। आयुर्वेद शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है आयु और वेद अर्थात आयु को बढ़ाने वाला वेद। आयुर्वेद में आहार और दिनचर्या को बहुत महत्व दिया जाता है। आयुर्वेद का उद्देश्य “स्वस्थस्य स्वास्थ्यरक्षणं” है जिसका अर्थ है स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ की रक्षा करना और रोगी व्यक्ति के रोगो को दूर करना है। जैसा की आप जानते है स्वस्थ रहना सबसे बड़ा सुख है तथा कहा भी गया है पहला सुख निरोगी काया जब शरीर निरोगी होगा तभी व्यक्ति किसी भी सुख को सही प्रकार से भोग सकता है

 

आयुर्वेद के सिद्धांत और आयुर्वेद का महत्व

 

जब शरीर स्वस्थ होगा तो मन भी स्वस्थ होगा क्योंकि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन निवास करता है शास्त्र कहते हैं “शरीर माध्यम खलु धर्म साधनम” अर्थात धर्म का पालन करने के लिए शरीर ही माध्यम है, शरीर के बिना यह संभव नहीं है। भारतीय वैदिक परम्परा में मनुष्य के चार परुषार्थ बताये गए हैं धर्म, अर्थ, काम, और मोक्ष जिनको पूर्ण करने के लिए मनुष्य को इस शरीर की आवश्यता होती है इसलिए आयुर्वेद का महत्त्व बहुत बढ़ जाता है।

 

आयुर्वेद का महत्व 2020

आयुर्वेद 

WHO के अनुसार स्वास्थ्य का अर्थ केवल खुश होने से ना होकर शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक स्वास्थ्य और सामाजिक स्वास्थ्य से भी है। स्वास्थ्य को एक व्यक्ति के जीवन मे इस तरह से समझा जा सकता है कि वह कैसा अनुभव कर रहा है। अपने निजी जीवन व सामाजिक जीवन मे कितना संतोष करता है। WHO के द्वारा कहा गया है कि किसी बीमारी का ना होना ही स्वास्थ्य नही है अपितु व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक तथा सामाजिक स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है।

स्वास्थ्य के प्रकार :-

यह 4 प्रकार के होते हैं:

  1. · शारीरिक स्वास्थ्य
  2. · मानसिक स्वास्थ्य
  3. · भावनात्मक स्वास्थ्य
  4. · सामाजिक स्वास्थ्य

आयुर्वेद के अनुसार जिस मनुष्य के दोष वात पित्त कफ अग्नि रस आदि सम धातु सम अवस्था में बने रहते है, मल मूत्र स्वेद की क्रिया ठीक रहती है और शरीर की सब क्रियायें सामान और उचित हैं और जिसके मन और इन्द्रिय आत्मा प्रसन्न रहे वह मनुष्य स्वस्थ है।

 

जैसा की पहले बताया गया है कि चार प्रकार के स्वास्थ्य होते है इनको ठीक रखने के लिए आयुर्वेद ने हमें दिनचर्या ऋतुचर्या के बारे मे बताया है ताकि व्यक्ति स्वस्थ रहे तथा योगाभ्यास का भी वर्णन है ताकि व्यक्ति सभी प्रकार से ठीक रहे।

 

आयुर्वेद के अनुसार हमारा स्वास्थ्य मेटाबोलिज्म पर निर्भर करता है जिसके लिए हमारी पाचक अग्नि का सही से कार्य करना अति आवश्यक है ठीक से भोजन न करना, दोषपूर्ण जीवन शैली, तनाव, अनिद्रा हमारी पाचक अग्नि को खराब कर देता है, जिसको आयुर्वेद के अनुसार सारी बीमारी की जड़ माना गया है इसलिए हमें अपनी पाचक अग्नि और मेटाबोलिज्म को ठीक रखना बहुत जरूरी है जिसके लिए हमें अपनी दिनचर्या को भी ठीक करना होगा

 

आयुर्वेद पंचकर्म चिकित्सा

 

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आयुर्वेद में दिनचर्या को ठीक करने के तरीके

 

7 से 8 घण्टे की नींद लेना बहुत आवश्यक है। रात को समय से सोये और सुबह में सूर्योदय से पूर्व उठें, जिसकी मदद से हमारा शरीर ऊर्जावान अनुभव करता है और हमारे शरीर की इम्युनिटी अच्छी बनी रहती है

 

  • सकारात्मक सोचें ताकि आपका मन हमेशा आपको प्रेरित करता रहे और आप पूरे दिन अच्छा अनुभव करते रहे।
  • अच्छी नींद के लिए अपने पैरो के तलवो में तथा सर में मालिश जरूर करें।
  • दिन में सोने से बचे ज्यादा जरूरी हो तो कुछ देर आराम करे पावर नेप लेलें।
  • रोजाना एक घण्टे तक योग का अभ्यास करे जिसमे आसान, प्राणायाम तथा ध्यान को शामिल करे( सुबहके समय इसको करना चाहिए)
  • कभी कभी योग के षट्कर्म का अभ्यास कुशल योग अध्यापक के न्रेतत्व में करें।
  • पानी का सेवन अच्छे से करें तथा नारियल पानी, निम्बू पानी, ग्रीन टी पिए जिससे शरीर हाइड्रेट बना रहता है।
  • भोजन में मसाले दालचीनी अजवाइन जीरा हल्दी धनिया लहसुन का प्रयोग करें।
  • घर से निकलने से पहले और बाद में आने के बाद दोनों नासिका में 3 से 4 बूँद तेल डालें।
  • समय से भोजन करें, पौस्टिक आहार लें , सात्विक चीजों का प्रयोग करें, छाछ और दही का सेवन दोपहर के भोजन में करें।
  • काली मिर्च, हल्दी युक्त दूध लें, मुलेठी का काढा तथा गलोय तथा आवला का रास पीयें,
  • कोल्ड ड्रिंक तथा बाहर के फास्टफूड से परहेज करें।
  • यथा संभव गर्म पानी पिएं।

साधारण बुखार में क्या करे

 

यदि मौसम बदलने से सामान्य सर्दी खासी बुखार हो तो चिंता न करे इन घरेलु उपचार को प्रयोग में लायें।

 

गर्म पानी पीयें।

 

सोंठ हल्दी कालीमिर्च ,तुलसी की चाय का सेवन दिन में तीन बार करें।

 

उपवास करें या पाचन में हल्का भोजन लें जैसे मूंग दाल रोटी दलिया लौकी तोरई की सब्जी आदि।

 

कभी कभी तनाव के कारण भी श्वास में परेशानी हो जाती है तो गहरी, लम्बी श्वास लें, पानी पीयें, अनुलोम विलोम और ध्यान का अभ्यास करें। यदि तेज बुखार हो तो सांस लेने में समस्या हो तो चिकित्सक से सलाह ले और घबराये बिलकुल नहीं।

 

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अभिषेक शर्मा

योगाचार्य 

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