Assam Flood in Hindi

Assam Flood in Hindi -मेरा नाम सौरभ है और आज मैं आपको बताने जा रहा हूँ एक नई नहीं मगर ज़रूरी जानकारी।

 

Assam Flood in Hindi

बाढ़, ये शब्द वैसे तो हमारी ज़िन्दगी से जुड़ा है, मगर इतनी भयानक बाढ़ें तो मैंने आजतक नहीं देखी। वर्तमान समय में असम के काजीरंगा पार्क का 85% हिस्सा पानी में डूब चुका है, काजीरंगा गेंडा संरक्षण के लिए विश्व विख्यात है।

अब ऐसे समय में जब 85% हिस्सा पानी में डूब चुका हो तो उन जानवरों के बारे में सोचने पर मेरी रूह कांप जाती है। हालाँकि वो जानवर आज भी प्रकृति से जुड़े हुए हैं, प्रकृति ने उन्हें ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए पहले से तैयार करके पैदा किया है।

उनके लिए हर दिन किसी संघर्ष की तरह ही होता है, वहां कोई समाज नहीं है, उन्हें रोज़ खाने के लिए मेहनत करनी होती है और साथ ही परभक्षियों से अपनी जान भी बचानी होती है।

ऐसे में इंसानी करतूतों की वजह से आ रही इतनी भयानक बाढ़ों को उन्हें झेलना पड़ रहा है। जी हाँ ये बाढ़ें प्राकृतिक कदापि नहीं हैं, इनके पीछे इंसानी गुरुर छिपा है।

गुरुर, एक नदी की धारा को मोड़ देने का, उसकी इठलाती चाल को काबू में कर लेने का, उसकी लहरों को किसी गर्त में समेट देने का और अपनी ख्वाहिशों के हवाई किलों पर इतराने का। चलिए एक सफर पर चलते हैं जहाँ हम इन बाढ़ों के पीछे छिपी वजहों पर रोशनी करेंगे:

Causes of flood in Assam (In Hindi)

Assam Flood

1 – ऊलजलूल तटबंध –

अगर आप नदियों के बारे में पढ़ेंगे तो पाएंगे कि नदियां कुछ सालों के बाद अपनी धारा बदल लेती हैं, ऐसा उनके द्वारा बहाकर लाइ गई मिट्टी के जमने की वजह से होता है।

नदी द्वारा लाई गई ये मिट्टी एक टापू के रूप में धीरे धीरे परिवर्तित होती जाती है फिर नदी को मजबूरन अपनी धारा खुद बदलनी पड़ जाती है।

ये प्रक्रिया बहुत ही जटिल व् धीमी होती है मगर ये प्राकृतिक है। इस प्रक्रिया की वजह से ही नदियां कभी सीधी दिशा में नहीं बहती, हमेशा इठलाती हुई चलती हैं। इन ऊलजलूल तटबंधों ने इस प्रक्रिया को रोक दिया है।

सालों से एक नदी एक ही दिशा में बह रही है और उनके द्वारा बहाकर लाई गई मिट्टी अब गाद के रूप में नदी के तल में जम रही है जिससे नदियों की गहराई लगातार कम होती जा रही है,

इसलिए जब ज़ोरदार बारिश होती है तो इस अतिरिक्त पानी को खुद में समेटकर रखने की क्षमता नहीं रहती और पानी तेजी से फैलने लगता है। ऐसे में जब कहीं से भी तटबंध टूटता है जो हमेशा होता ही है, वहां तबाही आ जाती है।

 

Cyclone Nisarga in hindi

2 – पावर प्लांट –

अपनी ऊर्जा की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भारत में नदियां एक कीमती स्रोत बनकर उभर रही हैं। दुनिया में इतनी सारी सदानीरा नदियां किसी और देश में नहीं हैं, जितनी भारत में हैं।

उत्तर में विशाल हिमालय होने की वजह से ये नदियां हमेशा पानी से लबालब रहती हैं। हिमालय को दुनिया का तीसरा ध्रुव भी कहा जाता है, जहाँ ग्लेशियर के रूप में अथाह पानी मौजूद है।

वो कहते हैं ना कि बिना लगाम का घोड़ा किसी काम का नहीं होता चाहे वो जितना तेज ही दौड़ क्यों ना ले। ठीक ऐसा ही हमारे देश में हो रहा है। रट्टू तोते हमारे यहाँ इंजीनियर कहे जाते हैं, वास्तविक ज्ञान तो उन्हें होता ही नहीं।

पावर प्लांट के नाम पर नदी का वेग रोक दिया जाता है, बहाव काम होने की वजह से नदियों में गाद जमती जाती है और फिर वही होता है जो मैंने ऊपर लिखा था। अतिरिक्त पानी को समेटकर रखने की क्षमता नहीं रह जाती और नदी तबाही मचा देती है।

3 – वेटलैंड की नज़रअंदाजी –

वेटलैंड से मतलब एक ऐसे भूमि से होता है जो खुद में अतिरिक्त पानी को सोखने की अचूक क्षमता रखती है। ये वेटलैंड हर नदी के किनारे पर होते हैं।

जब कभी नदियों में ज़्यादा पानी आ जाता है तो ये वेटलैंड 30% अतिरिक्त पानी को सोखने की क्षमता रखते हैं। मगर तटबंध बनाने की वजह से ये नदी से कट जाते हैं। अब ये अतिरिक्त पानी कहीं तो जायेगा ही और जहाँ जाता है वहां तबाही मचाता है।

 

कोरोना के बाद अब Tiddi attack (Locust Attack)

4 – नदी के व्यवहार की समझ –

दुनिया की जितनी भी सभ्यताएं हुई हैं, जिनमे हड़प्पा, मोहनजोदड़ो और बेबीलोनिया की सभ्यता अहम् हैं, सभी नदियों के किनारे पर ही फली फूली हैं।

आज भी उनके वंशज नदियों के किनारे रहते आ रहे हैं। एक किताबी कीड़े के मुकाबले उस नदी के बारे में उनका ज्ञान कहीं अधिक होता है।

जब कभी कोई परियोजना बनाई जाती है तो ऐसे लोग कोहिनूर का हीरा साबित हो सकते हैं। उनकी राय को समझने की ज़रूरत होती है, उन्होंने अपनी पूरी ज़िन्दगी उस नदी के किनारे बिताई होती है, उस नदी का व्यवहार उनसे अच्छा कोई समझ ही नहीं सकता।

मगर गुरुर में डूबे हुए तथाकथित पढ़े लिखे लोग बेतरतीब योजना ज़मीन पर उतार देते हैं। फिर उन नदियों के किनारे बसे इन्ही लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया जाता है।

5 – अतिक्रमण –

इंसान की फितरत साम्राज्यवादी है, वो जहाँ भी रहता है अपना साम्राज्य बढ़ाने के बारे में सोचता रहता है, चाहे वो अमीर हो या गरीब।

लोगों ने नदियों के किनारे पक्के मकान बनाये जो वेटलैंड्स में आते थे, ये वेटलैंड्स नदियों का बाढ़ क्षेत्र होते हैं। अतिरिक्त पानी प्राकृतिक रूप से इन हिस्सों में पहुँचता है।

मगर लोग कहाँ मानते हैं, इन वेटलैंड्स में ज़मीने बेचीं जाती हैं, बड़े बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू होते हैं और ये सब सरकार के संरक्षण में होता है।

जब पानी पहुँचता है, तो पक्की हो चुकी ज़मीन उस पानी को सोखने के काबिल नहीं बचती और इन्ही क्षेत्रों में जबरन बसने वाले लोग सबसे पहले इसके भुक्तभोगी होते हैं।

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अंत में :-

तो दोस्तों ये कुछ 5 सबसे बड़ी वजहें हैं Assam Flood in Hindi की आजकल की विकराल बाढ़ों के लिए। मेरी प्राकृतिक आपदा की श्रंखला में ये अगली कड़ी है। प्रकृति हमसे नाराज़ है और वो बदला लेकर रहेगी।

कोरोना, अम्फान, निसर्ग, टिड्डी दल, दिल्ली में भूकंप के बाद ये छठी घटना है जिसे यहाँ मैंने आपको बताने की कोशिश की। हमें प्रकृति को ध्यान में रखकर विकास करने की ज़रूरत है। ऐसा बिलकुल नहीं है कि ये हो ना सके। ज़रूरत होती है, दृष्टिकोण की।

जिस दिन दृष्टिकोण बदलकर सोचा जायेगा इन सब सवालों के जवाब भी मिल जायेंगे। तो आशा करता हूँ आपको मेरा ये लेख Assam Flood in Hindi पसंद आया होगा। कमेंट करके अपनी राय हमें दे सकते हैं।

 

 

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सादर नमस्कार!

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