आख़िर अमीर और अमीर क्यों होते जा रहे हैं ?

आख़िर अमीर और अमीर क्यों होते जा रहे हैं – मेरा नाम सौरभ है और आज मैं आपके लिए लेकर आया हूँ एक ऐसी जानकारी जिसको लेकर बातें तो काफी होती हैं मगर उन बातों के पीछे की वजह कोई नहीं बता पाता।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि लगभग पूरी दुनिया इस वक़्त महामारी और बेरोजगारी के भीषण दौर से गुजर रही है। लोगों को इस दोतरफा लड़ाई का सामना करना पड़ रहा है।

एक तरफ खुद को और अपने परिवार को बीमारी से बचाना है और दूसरी ओर उनके खाने पीने की ज़रूरतों का भी ख्याल रखना है।

लोगों की नौकरियां लगातार जा रही हैं, एक के बाद एक फैक्ट्रियां बंद होने से मध्यम आय वर्ग वालों की तो कमर ही टूट गई है। इस प्रकोप का सबसे जबरदस्त असर मध्यम आय वर्ग वालों को ही सबसे ज़्यादा हुआ है। मगर क्यों ? क्या आपने कभी सोचा ?

 

आख़िर अमीर और अमीर क्यों होते जा रहे हैं?

 

जवाब होगा ‘नहीं’ और ऐसा होना भी वाजिब है क्योंकि एक मध्यम वर्गीय इंसान से और कुछ आशा भी क्या की जा सकती है। ज़्यादा से ज़्यादा आप कोरोना पर दोषारोपण करके अपने आर्थिक समझ का दिखावा कर लेंगे। मगर ज़रा ठहरिये।

एक और खबर देखिये कि दुनिया के सबसे अमीर लोग और अमीर होते जा रहे हैं। उन लोगों में होड़ सी लगी है कि कौन कितने समय के लिए किस नंबर के पायदान पर बना रह सकता है।

क्या कोरोना का असर उनपर नहीं पड़ा ? तो मेरा जवाब है कि रत्ती भर भी नहीं। बल्कि वे तो ऐसे संकट का स्वागत करते हैं ताकि वो और अमीर हो सकें। कैसे ?

आइये चलते हैं एक अनोखे सफर पर जहाँ मैं आपको कुछ 3 तथ्यों से रूबरू करवाऊंगा और उन्हें जान, समझकर आपकी आँखें खुली की खुली रह जाएँगी।

 

1 – Centralization of Cashflow :-

 
जब कभी ऐसे विश्वव्यापी संकट आते हैं तो हमेशा सबसे पहले छोटे दुकानदार ख़त्म हो जाते हैं। क्योंकि छोटे दुकानदारों के पास सीमित पूँजी होती है जिसे वो रोज़ अपने धंधे में लगाता है फिर उसे घुमाता है और जो मुनाफा होता है उससे वो अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करता है।

ये प्रक्रिया रोज़ दोहराई जाती है। वैसे इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन अपने आप को लगातार आर्थिक रूप से शिक्षित करने की ज़रूरत होती है। छोटा दुकानदार एक तो कभी अपनी सोच में बदलाव नहीं करता और ना ही कभी कुछ नया सीखने की कोशिश भी करता है।

इस वजह से उसके पास रोज़ आने वाला कैशफ्लो लगभग बराबर ही बना रहता है। जब भी कोई आर्थिक विपदा आती है तो छोटे दुकानदार के पास पूँजी ही नहीं बचती मैदान में डटे रहने के लिए और वे गरीबी की चपेट में आ जाते हैं। उनका धंधा चौपट हो चुका होता है।

अब ऐसे में बचता वही है जिसके पास ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए पर्याप्त पूँजी होती है। वे बुरे वक़्त में अपने धंधे की संभाले रहते हैं और फिर एक विकल्प के रूप में उभरते हैं।

ऐसे में छोटे दुकानदारों के ग्राहकों के पास उनसे सामान खरीदने के अलावा कोई चारा नहीं बचता और बड़े दुकानदारों की डेली सेल गुणात्मक रूप से बढ़ जाती है।

मेरी इस बात का सबसे सटीक उदाहरण Amazon कंपनी है जिसने इस विपदा के समय में ऐसा ताबड़तोड़ बिजनेस किया है जिसकी कोई सीमा नहीं है।

इस कमाई के कारण Amazon कंपनी के मालिक Jeff Bezos हाल ही में 200 बिलियन डॉलर की अकूत संपत्ति के मालिक बन गए हैं। ढेर सारा पैसा जो पहले छोटे दुकानदारों में बंट जाता करता था अब सिर्फ एक आदमी की तरफ बह रहा है जिससे वो और अमीर हो रहा है।

 

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2 – Investment in God’s Money :-

 
भगवान का पैसा यानी कि गोल्ड व् सिल्वर। जैसा कि मैं अपने पहले के आर्टिकल्स में लिख चुका हूँ, ऐसी आर्थिक परिस्थितियों में अमीर लोग अपने पैसे को असली मुद्रा में बदल लेते हैं क्योंकि जब भी ऐसे हालात आते हैं और सरकारों के पास अपने खर्चे पूरे करने के लिए पैसे नहीं होते तो वे मुद्रा को devalue करने लगते हैं।

मतलब नए नोट छापने शुरू कर देते हैं जिससे मुद्रा की वैल्यू दिन पर दिन घटती जाती है। जब किसी देश की मुद्रा की वैल्यू घटती है तो वहां पर हर चीज़ के दाम बढ़ना शुरू हो जाते हैं मगर गोल्ड और सिल्वर के दाम आम ज़रूरत की चीज़ों के दामों से 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं।

अमीर लोग इस सुनामी को आते हुए पहले से ही देख लेते हैं इसलिए वे इसके लिए पहले से तैयारी कर चुके होते हैं। और वे ऐसा सिर्फ इसलिए कर पाते हैं क्योंकि उनके पास फाइनेंसियल एजुकेशन होती है। जबकि आम इंसान कभी इस शिक्षा की महत्ता को समझना ही नहीं चाहता।

उसे अमीर लोग लालची नज़र आते हैं। ये सिर्फ एक हीन भावना है और इससे ज़्यादा कुछ नहीं। मध्यमवर्ग का इंसान अमीरों से शिक्षा लेने और उनकी तरह आगे बढ़ने की बजाये उनसे ईर्ष्या करने लगता है।

अमीर लोग अपनी दौलत को गोल्ड और सिल्वर में बदल देते हैं। क्योंकि अमीर लोग नेटवर्थ के लिए काम करते हैं इसलिए वे और अमीर होते जाते हैं।

जबकि गरीब इंसान ऐसे समय में प्रचलित मुद्रा की सहेजने की कोशिश करता है जिसकी वैल्यू लगातार वैसे भी कम हो रही होती है। इसलिए वो पहले से और ज़्यादा गरीब होता जाता है।

 

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3 – Bailout Packages :-

 
जब कभी किसी देश में ऐसी आर्थिक विपदा आती है तो सरकारें अर्थव्यवस्था को सहारा देने के बहाने इन गिने चुने अमीर लोगों के लिए इस तरह के पैकेज लाती है। देखने में तो ये पैकेज एवेरेस्ट की तरह भारी भरकम होते हैं मगर गरीबों को उसमे से कुछ नहीं मिलता।

ये पैकेज हमेशा अमीरों को बचाने के लिए लाया जाता है और उसे पेश ऐसे किया जाता है जैसे सब कुछ गरीबों को ध्यान में रखकर लाया जा रहा है।

इस पैकेज के द्वारा लाये गए अतिरिक्त पैसे को अर्थव्यवस्था में डालने के सिर्फ 2 माध्यम होते हैं। पहला ये कि लोग लोन लेना शुरू करें जिससे उस पैसे का डिस्ट्रीब्यूशन शुरू हो जाये और दूसरा NBFC के ज़रिये सीधे स्टॉक मार्केट में डाला जाये।

गरीब लोगों क ऐसे हालात में जब कमाई के कोई आसार नज़र नहीं आते तो लोग लोन भी नहीं लेते हैं तो विकल्प सिर्फ दूसरा वाला बचता है कि सीधा स्टॉक मार्केट में पैसे को डाला जाये। अब स्टॉक मार्केट में कंपनियां तो अमीर लोगों की ही होती हैं। यहाँ अमीर लोग और अमीर होते जाते हैं।

Tesla कंपनी के संस्थापक Elon Musk मेरी इस बात के सटीक उदाहरण हैं। जहाँ Tesla साल के 1000 वाहन भी नहीं बेच पा रही है मगर उसके शेयर आसमान छू रहे हैं। इसी के साथ साथ Elon Musk और भी ज़्यादा अमीर होते जा रहे हैं।

 

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तो दोस्तों ये रहे कुछ 3 प्रमुख कारण कि क्यों आख़िर अमीर और अमीर क्यों होते जा रहे हैं  जबकि गरीब और गरीब।

आशा करता हूँ कि आपको मेरा ये आर्टिकल आख़िर अमीर और अमीर क्यों होते जा रहे हैं  पसंद आया होगा। जुड़े रहिये हमारे साथ और भी रोचक जानकारियों के लिए।

 

धन्यवाद!

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