अब बिजनेस करना क्यों ज़रूरी हो गया है?

मैं सौरभ, आप सभी का स्वागत करता हूं हमारे Money Sarthi के इस नए आर्टिकल अब बिजनेस करना क्यों ज़रूरी हो गया है में।

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सभी जगह यानी कि हर एक कंपनी अपने अपने कर्मचारियों के वेतन में कटौती कर रही है। इसकी वजह ये है कि कंपनी को बड़ा नुकसान हो रहा है।

कोई भी अर्थव्यवस्था चाहे वो की देश की हो, राज्य की हो, जिले की हो, तहसील की हो, तालुके की हो, ब्लॉक की हो, नगर की हो, मोहल्ले की हो, गांव की हो या फिर कहें विश्व की हो सिर्फ तभी आगे बढ़ सकती है जब बाज़ार में डिमांड बढ़े यानी कि लोग अपनी अपनी ज़रूरत का सामान खरीदने के लिए आगे आएं।

परन्तु, मैं वर्तमान समय या भविष्य को जितना समझ पा रहा हूं मुझे ऐसी स्थिति नजर नहीं आती जहां लोग ज़रूरी चीज़ों जैसे कि खाद्य सामग्री के अलावा कहीं और पैसे खर्च करना शुरू करेंगे।

हमारा समाज बहुत सेंसेटिव है, एक बार अगर व्यवस्था से भरोसा उठ गया तो आप लाख कोशिश कर लो मगर हालात को दोबारा उसी रूप में लाने में कामयाब नहीं हो सकते।

नोटबंदी इसका एकदम सटीक उदाहरण अब बिजनेस करना क्यों ज़रूरी हो गया है। उस घटना के बाद लोगों का विश्वास हिल गया इसके फलस्वरूप बाज़ार से लिक्वडिटी कम होना शुरू हो गई।

 

अब बिजनेस करना क्यों ज़रूरी हो गया है?
Notebandi

अब ऐसी स्थिति में जब लोग खाद्य सामग्री के अलावा कहीं खर्च करेंगे ही नहीं तो बाज़ार में डिमांड पैदा नहीं होगी और जब डिमांड नहीं होगी तो फैक्टरियां दोबारा से माल बनाना शुरू कैसे कर पाएंगी?? और इसका नतीजा यही निकलेगा कि को बेरोजगार हुए हैं वो भुखमरी की ओर चले जाएंगे।

 

वापस लौटते हैं अपने टॉपिक बिजनेस करना क्यों ज़रूरी हो गया है? पर, कंपनियां अपने यहां कर्मचारी की छटनी शुरू कर चुकी हैं। जिनकी नौकरी चली जाएगी ये सिर्फ उनके लिए ही समस्या नहीं होने जा रही। जो बच जाएंगे उनका शोषण ऐसा होगा जो आपको गुलाम प्रथा के साक्षात दर्शन हो जाएंगे।

अब आपमें से कई ये सोच रहे होंगे कि जब कंपनी कमाएगी नहीं तो तनख्वाह कैसे देगी??? आपका तर्क बिल्कुल सही है, मगर ये बताईए अगर कंपनी का फायदा बढ़ गया हो तब वो क्या करेगी?? अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसी स्थिति में या तो तनख्वाह बढ़ेगी या फिर स्थिर रहेगी। है ना???

 

अब बिजनेस करना क्यों ज़रूरी हो गया है? recession
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लेकिन परिस्थिति इतनी आसान सी नहीं है। हाल ही के कंपनियों के नतीजे उठाकर देखिए तो कई ऐसे सेक्टर हैं जो ऑनलाइन वर्क कर रहे थे। उनके कर्मचारी रोज़ 14-14 घंटे काम भी कर रहे हैं।

इसी आस में कि एक दिन ये वायरस अपना असर खो देगा और धीरे धीरे जीवन सामान्य हो जाएगा तब ऐसे Corona Warriors को इज्ज़त और पैसों से नवाजा भी जाएगा। मगर ऐसा होते नहीं दिख रहा।

 

टेलीकॉम सेक्टर की अग्रणी कंपनी अपने ऐसे कर्मचारियों का भी कोई वेतन बढ़ाने नहीं जा रही। जबकि उसकी कमाई में बढ़त ही हुई है और शेअर बाजार में अबतक का सबसे बेहतरीन परफॉरमेंस माना जा रहा है।

और तो और उसने अपने शेयर होल्डर्स को इस कमाई का बोनस भी दिया है मगर अपने कर्मचारियों को पैसे देने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं जिनकी दिन रात की मेहनत से वो इस मुकाम तक पहुंच पाए हैं।

कर्मचारियों में रोष व्याप्त है, ना जाने कभी फूटेगा या नहीं क्योंकि लेबर लॉ के अभाव में उनके किसी भी प्रकार के विरोध के कोई मायने नहीं हैं।

ये तो हुई सामाजिक बात, अब ज़रा आर्थिक असर के बारे में बात करते हैं।

 

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मान लीजिए एक कर्मचारी की वार्षिक आय 5 लाख रुपए है, वर्तमान महंगाई दर है 8.5%। इस हिसाब से अगर देखा जाए तो उसे कम से कम 42500 रुपए की ज़रूरत है ताकि उसके कमाए गए पैसों की वैल्यू बनी रहे।

हर साल सारी कंपनियां कुछ इसी दर के आस पास वेतन बढ़ाती हैं। लोगों को लगता है उनकी कमाई बढ़ गई मगर असल में सिर्फ उनके पैसों की वैल्यू ही बराबर की जाती है।

अब अगर कंपनी वेतन नहीं बढ़ा रही है तो कर्मचारी पर दोहरा बोझ पड़ेगा। एक जो कमाई बढ़नी थी वो बढ़ी नहीं यानी 42500 और दूसरा अगले एक साल में उनके पैसों की जो वैल्यू कम हुई उसके 42500 अलग।

अर्थात कुल मिलाकर 85000 रुपए सालाना का नुकसान हुआ। कंपनी चाहती तो इस नुकसान को आधा तो कर ही सकती थी। मगर परिस्थितियों की आड़ में सिर्फ कर्मचारी का शोषण किया गया।

 

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इसलिए मैं कहता हूं बिजनेस करना क्यों ज़रूरी हो गया हैये समय कर्मचारी होने का नहीं है। ख़ुद की सोच को बदलने का है। कंपनी एक बिजनेस मैन है जिसने पैसा कमाया, और कर्मचारी एक नौकर है जिसने दोगुना काम भी किया मगर पैसा गवाया।

अब अगर अधिकतर लोग कर्मचारी ही होंगे और उनकी नौकरी जाती ही रहेगी तो डिमांड कैसे पैदा होगी? क्योंकि लोगों के जेब में पैसा ही नहीं होगा। मैं ये चाहता हूं कि अब आप नौकरी पाने की इच्छा को तिलांजलि दे दीजिए। अब आपको नौकरी देने वाला बनना है।

अगर एक आदमी कोई छोटा सा भी बिजनेस शुरू करता है तो औसतन 5 लोगों को रोज़गार दे सकता है। ऐसा मैंने खुद किया है और वो भी नौकरी करते हुए। अगर मैं कर सकता हूं तो आप भी कर सकते हैं।

बस अगर ज़रूरत है तो सही दिशा निर्देश की। वरना इस सफर में बहुत से लोग आधे रास्ते से ही अपने घर को लौट जाते हैं। मगर जो सफ़र जारी रखते हैं चाहे कितनी ही मुश्किल क्यों ना आए, वो सफलता के झंडे गाड़ के है दम लेते हैं।

आज जब मैं ये आर्टिकल लिख रहा हूं, मुझे खबर मिली कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लूट खसोट जैसे अपराधों में वृद्धि होना शुरू हो चुकी है।

ना जाने ये कहां तक पहुंचेगी। इन सबका कारण बस एक है वो है बेरोजगारी। परन्तु, उन्हें सही दिशा निर्देश की आवश्यकता है। जब वो सही दिशा पा जाएंगे तो ऐसे रास्तों से खुद किनारा कर लेंगे और दूसरों को प्रेरित भी करेंगे।

इसलिए ख़ुद का सहारा बनने के साथ साथ आपको समाज का सहारा भी बनना होगा। क्योंकि एक बेहतर इंसान ही बेहतर समाज बना सकता है जिसमें उसकी नस्लें आराम से रह सकें।

भूख का क्या है? वो तो हर दिन लगती है। और यही प्रवृति लोगों को हिंसक होने को मजबूर कर देगी।

अब बिजनेस करना क्यों ज़रूरी हो गया है?
जागो उठो और सोचो

 

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सादर नमस्कार!

5 thoughts on “अब बिजनेस करना क्यों ज़रूरी हो गया है?”

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